Ganesh Chaturthi Special: चंद्रमा ने उड़ाया गणेश जी का मजाक, क्रोधित होकर दिया यह श्राप, जानें गणेश चतुर्थी से संबंधित ये पौराणिक कथा

Ganesh Chaturthi Special: धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन को मिथ्या कलंक से जोड़ा जाता है. जानें भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूरी पौराणिक कथा, चंद्रमा को मिले श्राप की वजह और भूल से चंद्र दर्शन हो जाए तो क्या उपाय करें.

Ganesh Chaturthi Special: गणेश चतुर्थी 2026 का त्योहार आज 14 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है. प्रभात खबर की ‘गणेश चतुर्थी स्पेशल’ सीरीज में आज हम आपको बताने जा रहे हैं गणेश जी की वो कथा जिसमें उन्होंने चंद्रदेव को श्राप दे दिया था, फिर कैसे उन्होंने उस श्राप के प्रभाव को कम किया एक बार भगवान गणेश अपने वाहन मूषक पर सवार होकर कहीं जा रहे थे. गणेश जी का शरीर बड़ा था पर उनका वाहन मूषक छोटा था. रास्ते में मूषक का संतुलन बिगड़ गया और गणेश जी भी उसके साथ जमीन पर गिर पड़े. जब चंद्रमा ने यह दृश्य देखा तो वे अपनी हंसी नहीं रोक पाए. चंद्रमा को अपने सौंदर्य पर गर्व था". चंद्रमा की हंसी को गणेश जी ने अपना अपमान समझा और वे क्रोधित हो गए. गुस्से में गणेश जी ने चंद्रमा को गणेश पुराण में भगवान गणेश से जुड़े अनेक प्रसंगों में उनके स्वरूप, महिमा और लीला का वर्णन मिलता है. इसी पुराणिक परंपरा में गणेश जी और चंद्रमा से जुड़े प्रसंग को भी गणेश चतुर्थी की मान्यताओं से जोड़ा जाता है.

गणेश जी ने दिया चंद्रमा को श्राप

कथा के अनुसार, चंद्रमा के व्यवहार से क्रोधित होकर क्रोधित होकर भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया कि चंद्रमा को जिस चांदनी का गुरुर है, आज के बाद वो उसे खो देंगे. गणेश जी के श्राप देने के बाद सम्पूर्ण आकाश में अंधकार छा गया, यह देख चन्द्र देव गणेश जी  के शरण में आकर बोले, "हे दुःखहर्ता! मुझसे बड़ी भूल हो गई. मैंने आपके स्वरूप का मजाक बनाया और अनजाने में आपका अपमान किया, मुझसे भूलवश अपराध हो गया. प्रभु, अगर मेरी चांदनी छीन ली गई तो मेरा वजूद समाप्त हो जाएगा. मुझपर कृपा करें और मेरी भूल के लिए मुझे क्षमा करें."

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गणेश जी ने श्राप के प्रभाव को किया सीमित

चंद्रमा को विनम्र प्रार्थना और पश्चाताप को देखते हुए गणेश जी का क्रोध शांत हुआ. उन्होंने कहा कि वे अपने श्राप को वापस तो नहीं ले सकते, पर उसके प्रभाव को सीमित कर सकते हैं. उन्होंने चंद्रमा से कहा कि महीने में एक दिन उनका (चंद्रदेव का) प्रकाश पूरी तरह क्षीण रहेगा और शेष दिनों में तेज घटता-बढ़ता रहेगा. इसके बाद उनकी पूजा भी की जाएगी और उन्हें सम्मान प्राप्त होगा. कथा के विभिन्न संस्करणों में श्राप के प्रभाव को सीमित करने का अलग-अलग वर्णन मिलता है. एक प्रचलित मान्यता के अनुसार चंद्रमा के घटने-बढ़ने को इसी प्रसंग से जोड़ा जाता है.

चंद्रमा दिख जाए तो क्या करें?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि गणेश चतुर्थी के दिन भूलवश चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो भगवान गणेश की पूजा कर उनसे क्षमा मांगनी चाहिए. परंपरा के अनुसार, गणेश जी का स्मरण, मंत्र जाप और उनकी कथा का श्रवण करने की परंपरा भी बताई जाती है.


गणेश चतुर्थी पर प्रचलित है गणेश जी और कृष्ण जी की ये कहानियां

इस संदर्भ में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी स्यमंतक मणि की कथा का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है. श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में स्यमंतक मणि प्रसंग आता है, जहां श्रीकृष्ण पर मणि चोरी करने का आरोप लगाया गया था और बाद में सत्य सामने आया. गणेश चतुर्थी के चंद्र-दर्शन से जुड़ी धार्मिक मान्यता में इस कथा का स्मरण झूठे कलंक से मुक्ति के संदर्भ में किया जाता है.

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लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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