Premanand Ji Maharaj: क्या सच में एक ही पति सात जन्मों तक मिलता है? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया रहस्य

Premanand Ji Maharaj: शादी को लेकर एक प्रचलित धारणा है कि विवाह के पल से लेकर सात जन्मों तक पति-पत्नी एक-दूसरे के हो जाते हैं. पति-पत्नी दोनों सातों जन्मों तक साथ रहते हैं. इस विषय पर प्रेमानंद जी महाराज का क्या कहना है, आइए जानते हैं.

Premanand Ji Maharaj: आपने अक्सर लोगों को कहते हुए सुना होगा कि शादी के बाद पति-पत्नी एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं. शादी के दिन से लेकर सात जन्मों तक पति-पत्नी एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी बन जाते हैं. हिंदी फिल्मों और टीवी सीरियल्स में भी इस धारणा पर काफी जोर दिया जाता है. लेकिन क्या यह मान्यता वास्तव में सही है? क्या शास्त्रों में सच में ऐसा कहा गया है? आइए, इन सभी सवालों के जवाब प्रेमानंद जी महाराज के माध्यम से जानते हैं.

क्या सात जन्मों तक एक ही पति मिलता है?

एक भक्त ने प्रेमानंद जी महाराज से प्रश्न किया कि “क्या सातों जन्मों में मुझे एक ही पति मिल सकता है? मैं अपने पति से बहुत प्रेम करती हूं.”इस प्रश्न पर प्रेमानंद जी महाराज ने उत्तर देते हुए कहा कि ऐसा संभव नहीं है. भले ही आप अपने पति से बहुत प्रेम करती हों और उनके प्रति पूरी तरह समर्पित हों, फिर भी सात जन्मों तक एक ही जीवनसाथी मिलना आवश्यक नहीं है. जीवन कोई फिल्म या नाटक का मंच नहीं है, बल्कि यह वास्तविकता है, जहां हर आत्मा का अपना अलग-अलग कर्म और फल होता है.

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, पति और पत्नी—दोनों के ही क्रम अलग-अलग होता है. दोनों का प्रारब्ध यानि भाग्य अलग होता है . दोनों के संचित यानि जमा किया गया पूण्य अलग-अलग होते हैं. इसी कारण इस जन्म में जो आपका पति या पत्नी है, वही अगले जन्म में भी आपको मिले, यह जरूरी नहीं है.

सात जन्मों तक एक ही पति पाने का उपाय

प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति सच में चाहता है कि उसे सात जन्मों तक एक ही जीवनसाथी मिले, तो इसका केवल एक ही उपाय है. उन्होंने कहा कि—यदि कोई व्यक्ति भगवान की सेवा करे, तपस्या करे और उनसे यह वरदान माँगे कि उसे सात जन्मों तक एक ही जीवनसाथी मिले, और यदि भगवान यह वरदान प्रदान कर दें, तभी यह संभव हो सकता है. इसके अलावा कोई दूसरा मार्ग नहीं है.

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Published by: Neha Kumari

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