New Criminal Laws : अब हिट एंड रन और धोखे से शारीरिक संबंध बनाने पर होगी ये सजा

New Criminal Laws : नए आपराधिक कानूनों में कई अपराधों को परिभाषित किया गया है और कुछ ऐसे कानून भी है, जिन्हें समाप्त कर दिया गया है, क्योंकि वे समय के अनुसार इस्तेमाल में नहीं थे. राजद्रोह का मामला कुछ इसी तरह का अपराध है. भारतीय न्याय संहिता में 358 सेक्शन है, जबकि आईपीसी में 511 थे. नए आपराधिक कानूनों में 20 नए अपराधों को शामिल किया गया है.

New Criminal Laws :  एक जुलाई 2024 से देश में तीन नए कानून लागू हो रहे हैं. इन कानूनों को देश के लिए जरूरी और वक्त के अनुसार माना जा रहा है. नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के लागू होने से देश में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम समाप्त हो जाएंगे. इन नए आपराधिक कानूनों को संसद ने पिछले साल शीतकालीन सत्र के दौरान पारित किया था.

इन तीन कानूनों की खासियत यह है कि इसमें कई अपराधों को परिभाषित किया गया है और कुछ ऐसे कानून भी है, जिन्हें समाप्त कर दिया गया है, क्योंकि वे समय के अनुसार इस्तेमाल में नहीं थे. राजद्रोह का मामला कुछ इसी तरह का अपराध है. भारतीय न्याय संहिता में 358 सेक्शन है, जबकि आईपीसी में 511 थे. नए आपराधिक कानूनों में 20 नए अपराधों को शामिल किया गया है. इस न्याय संहिता में 33 अपराधों के लिए जेल की सजा को बढ़ाया गया है, जबकि कुछ मामलों में मौत की सजा का प्रावधान भी किया गया है.

New Criminal Laws : माॅब लिंचिंग के लिए सजा का प्रावधान

अब माॅब लिंचिंग होने पर सजा का प्रावधान

अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा ने बताया कि एक जुलाई से जो तीन नए कानून लागू हो रहे हैं, वे दंड और साक्ष्य से संबंधित हैं. यानी किसी अपराध पर क्या सजा हो सकती है और किसी मामले की सुनवाई के दौरान साक्ष्य जो पेश किये जाते हैं उसे लेकर क्या कानून है. 

माॅब लिंचिंग : नए आपराधिक कानूनों में जो सबसे बड़ा बदलाव दिख रहा है वो ये हैं कि अब माॅब लिंचिंग होने पर सजा का प्रावधान है, जो पहले नहीं था. नए कानून में माॅब लिंचिंग को परिभाषित कर दिया गया है जिसके तहत यह कहा गया है कि अगर पांच व्यक्तियों का समूह किसी को इरादतन मारता है और उसकी मौत हो जाती है तो उसमें सजा का प्रावधान है.

हिट एंड रन : नए कानून में हिट एंड रन को भी परिभाषित किया गया है और इसकी गंभीरता को भी बढ़ाया गया है. आईपीसी की धारा 279 में पहले यह जमानती अपराध था, जब किसी की गाड़ी से किसी का एक्सीडेंट हो जाता था. अब भी यह प्रावधान न्याय संहिता के 106 (1) में है. लेकिन 106 (2) में मामले की गंभीरता को बढ़ाया गया है और बताया गया है कि अगर आपकी गाड़ी से किसी का एक्सीडेंट होता है और अगर आप बिना पुलिस या किसी मजिस्ट्रेट को सूचित किए बिना वहां से चले जाते हैं, तो अपराध गैरजमानती हो जाएगा. 

नाबालिगों से अपराध करवाने पर सजा का प्रावधान

संगठित अपराध : नए कानून में संगठित अपराध को डिफाइन किया गया है. संगठन से संबंध होने पर अपराध का प्रावधान किया गया है. संगठित अपराध के लिए 20 साल की सजा और न्यूनतम 10 लाख की सजा का अपराध है. संगठित अपराध के लिए फांसी की सजा का प्रावधान भी किया गया है. इसके तहत बमबाजी, गैंगवार जैसी घटनाएं शामिल हैं. 

आतंकी गतिविधि : नए कानूनों में आतंकी गतिविधियों को भी परिभाषित करके इसमें शामिल किया गया है और उसके लिए सजा का प्रावधान किया गया है. नए कानूनों के तहत नाबालिगों से अपराध करवाने वालों के लिए भी सजा का प्रावधान किया गया है. यानी जितनी सजा अपराध करवाने वालों को होगी उतनी ही सजा अपराध करवाने वालों को भी होगी.

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क्राइम अगेंस्ट वूमेन एंड चाइल्ड में सख्त सजा की व्यवस्था

क्राइम अगेंस्ट वूमेन

क्राइम अगेंस्ट वूमेन एंड चाइल्ड: भारतीय न्याय संहिता में एक नया चैप्टर जोड़ा गया है जिसे नाम दिया गया है -क्राइम अगेंस्ट वूमेन एंड चाइल्ड. इस चैप्टर में यौन अपराधों की चर्चा है, साथ ही इस संहिता में 18 साल से कम उम्र की महिलाओं के साथ अगर बलात्कार होता है तो उसकी सजा में बदलाव का प्रावधान किया गया है. गौरतलब है कि नाबालिग महिला से सामूहिक बलात्कार से संबंधित प्रावधान को इस संहिता में POCSO एक्ट के अनुरूप बनाया जाएगा. साथ ही इस संहिता में यह प्रावधान भी है कि अगर 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ बलात्कार होता है तो दोषी को आजीवन कारावास या मृत्युदंड दिया जाए. संहिता में यह प्रावधान भी किया गया है कि बलात्कार पीड़ितों की जांच करने वाले चिकित्सकों को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट जांच अधिकारी को सौंपनी होगी.

गैंगरेप के सभी मामलों में 20 साल की कैद : रेप के मामलों में इस न्याय संहिता काफी कठोर कानून हैं, साथ ही सजा को भी बढ़ा दिया गया है. न्याय संहिता के अनुसार गैंगरेप के सभी मामलों में 20 साल की कैद होगी या फिर आजीवन कारावास की सजा होगी. इसमें 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ रेप का नया कानून भी शामिल है. यह संहिता उन लोगों के लिए भी खतरे की घंटी होगी जो महिलाओं से शारीरिक संबंध धोखे से बनाते हैं, वे विश्वास में लेते हैं कि शादी करेंगे लेकिन उनका इरादा शादी का होता नहीं है. इस तरह की सोच के लोगों के लिए भी यह संहिता कठोर दंड का प्रावधान करती है. 

मोबाइल पर भेजा जाएगा समन

अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा ने बताया कि 2012 के निर्भया कांड के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर जो कुछ किया गया था, उसे इस न्याय संहिता में व्यवस्थित कर दिया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय साक्ष्य एक्ट में जो बड़ी बात दिखी है वो है ऑडियो -वीडियो  और डिजिटल फाॅर्म में भी मौजूद साक्ष्य को दस्तावेज माना जाएगा. साथ ही सभी तरह की जब्ती की वीडियोग्राफी होगी. साथ ही मोबाइल फोन पर समन भेजना भी इस एक्ट के तहत सही माना जाएगा. साथ ही ऑनलाइन एफआईआर करने की सुविधा भी दी गई है. अब कोई व्यक्ति किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर अपनी रिपोर्ट लिखवा सकता है, रिपोर्ट लिखने में थाना क्षेत्र की बाध्यता नहीं होगी.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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