Maldives Game : मुइज्जु भारत के साथ क्यों खेल रहा लुकाछिपी? मजबूरी या रणनीति

भारत दौरे से पहले मालदीव ने चीन के साथ क्यों किया बड़ा रक्षा करार? खिलाड़ी है या मोहरा

Maldives Game : कहते हैं कि कूटनीति की बिसात पर जो दिखता है, वह होता नहीं और जो होता है, वह दिखता नहीं. भारत और मालदीव के बीच कुछ ऐसा ही हो रहा है. कूटनीति के पंडित गिरगिट की तरह पल-पल रंग बदलते मालदीव को देखकर चकित हैं. 

पहले तो लग रहा था कि मालदीव अब सुधर रहा है. पर्यटन के आंकड़ों में गिरावट के बाद उसका चीन से मोहभंग हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ-ग्रहण में मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मुइज्जु के आने को एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा था. इसके बाद भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी मालदीव का दौरा किया. फिर इब्राहिम मुइज्जु ने भी भारत दौरे की इच्छा प्रकट की. 

Maldives Game : दिल्ली आने से पहले मुइज्जु ने भारत को क्यों दिया झटका

मुइज्जु का भारत दौरा तय हो चुका है. हालांकि इसकी तारीख का तय होना अभी बाकी है. इस दौरे में दोनों देशों के बीच कई समझौते होने हैं. अनुमान लगाया जा रहा था कि मुइज्जु के भारत दौरे के बाद संबंध पहले की तरह सामान्य हो जाएंगे. 

इसी बीच मुइज्जु ने कुछ ऐसा कर दिया है कि भारत का उसके ऊपर भरोसा करना मुश्किल हो गया है. वैसे भी मुइज्जु का भारत विरोध जगजाहिर है. भारत आने से पहले मुइज्जु ने अपने रक्षा मंत्री घासन मौमून को चीन भेजा है. इस दौरान मालदीव और चीन के बीच रक्षा उपकरणों और सैन्य प्रशिक्षण में सहयोग के लिए दोनों देशों में समझौते हुए हैं. पहले मालदीव इन दोनों मामलों में भारत का सहयोग लेता था. चीन के साथ मालदीव के हुए इन समझौतों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है. 

Maldives Game : मालदीव खिलाड़ी की जगह मोहरा तो नहीं बन गया

मालदीव के राष्ट्रपति दक्षिण एशिया की दो बड़ी महाशक्तियों के बीच डबल गेम खेलकर खुद को भले ही रणनीति के खेल का माहिर खिलाड़ी मान रहे हों, लेकिन सच्चाई यही है कि वे कूटनीति की बिसात पर केवल एक मोहरा बन कर रह गए हैं. भारत जैसे मित्र से अदावत कर उन्होंने खुद को दुनिया में अविश्वसनीय बना लिया है. 

सभी जानते हैं कि यूरोप और अमेरिका की शक्तियों की दक्षिण एशिया के मामलों में गहरी रुचि है. हिंद महासागर में मालदीव की स्थिति सामरिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है. मालदीव चीन और भारत दोनों को खोये बगैर अपनी इस स्थिति का लाभ उठाना चाहता है.

 इसमें भारत को छोड़कर चीन समेत यूरोप और अमेरिका की अधिकतर शक्तियां मालदीव से अपना हित साधने में लग गई हैं. चीन पहले ही मालदीव को अपने कर्ज जाल में फंसा चुका है. इस तरह मालदीव अपनी ही शातिर चालों में फंसकर खुद को पतन के दुष्चक्र में घेर चुका है. 

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Author: Mukesh Balyogi

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