Magadha Empire : अजातशत्रु के बेटे उदयिन ने की थी पटालिपुत्र की स्थापना, लेकिन अन्य शासक निकले नाकाबिल

Magadha Empire : अजातशत्रु के बेटे उदयिन ने पाटलिपुत्र को मगध की राजधानी बनाया. उससे पहले राजगीर मगध की राजधानी थी. पाटलिपुत्र को राजधानी बनाने के पीछे राजधानी को सुरक्षित करना था, क्योंकि यह गंगा और सोन नदी के तट पर बसा था. साथ ही यहां से व्यापार भी आसान हो गया था.

Magadha Empire :  हर्यक वंश के शासक अजातशत्रु के बाद उसके पुत्र उदयिन ने मगध की कमान संभाली. लेकिन उदयिन अपने पिता अजातशत्रु की तरह प्रतापी नहीं था. उसके सत्ता में आते ही मगध का साम्राज्य कमजोर पड़ने लगा था और एक तरह से हर्यक वंश का पतन शुरू हो गया था.  

अजातशत्रु के उत्तराधिकारी कमजोर थे

अजातशत्रु की मृत्यु के बाद उसके पुत्र उदयिन गद्दी पर बैठे. उन्होंने पिता की तरह राज्य विस्तार की कोशिश तो की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए. इतिहासकारों का मानना है कि उदयिन राज्य को विस्तार नहीं दे पाया और ना ही उसने कोई बड़ा युद्ध ही जीता. हालांकि उदयिन का शासनकाल 16 वर्षों तक चला, लेकिन इन 16 वर्षों में उसने अपने राज्य को विस्तार देने में कोई बड़ा युद्ध नहीं जीता. इसके विपरीत उसकी क्षमताओं पर भी सवाल उठने लगे थे. उसके बाद अनिरुद्ध, दर्शक, मुंडा जैसे शासक हुए, लेकिन वे सब कमजोर थे. महाराजा नागदशक के उपरांत हर्यक वंश का अंत हो गया और मगध पर शिशुनाग वंश का शासन स्थापित हो गया.

अजातशत्रु के बेटे ने पाटलिपुत्र को बनाया मगध की राजधानी

अजातशत्रु का बेटा उदयिन अपने राज्य को विस्तार भले ना दे सका हो, लेकिन उसने अजातशत्रु द्वारा बसाई गई छोटी नगरी पाटलिपुत्र को मगध की राजधानी बनाया और उसी पाटलिपुत्र पर मौर्य और गुप्त जैसे राजवंशों ने शासन किया. पाटलिपुत्र गंगा और सोन नदी के तट पर बसा है, जो सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जाता था. चारों ओर नदी से घिरा होने की वजह से पाटलिपुत्र को आक्रमणकारियों से सुरक्षित माना जाता था. पाटलिपुत्र से पहले राजगीर मगध की राजधानी थी, जो चारों ओर पहाड़ियों से घिरी थी. गंगा नदी के किनारे होने की वजह से यहां से व्यापार बहुत सहज और सुलभ हो गया था. इतिहासकार रोमिला थापर ने अपनी किताब A History of India में लिखा है कि मगध शासक उदयिन ने गंगा और सोन नदी के तट पर पाटलिपुत्र को बसाया और एक प्रमुख प्रशासनिक और रणनीतिक केंद्र बनाया. पाटलिपुत्र मगध के सैन्य और व्यापारिक विस्तार का केंद्र बना. आरसी मजूमदार ने लिखा है कि उदयिन ने पाटलिपुत्र को नई राजधानी बनाकर मगध साम्राज्य को भविष्य की महानता की ओर अग्रसर किया था. पाटलिपुत्र की स्थापना जिस उद्देश्य से की गई थी वह उसमें सौ फीसदी सफल रहा.

हर्यक वंश के बाद शिशुनाग वंश का मगध पर रहा राज

हर्यक वंश के बाद शिशुनाग और नंद वंश ने मगध पर किया शासनहर्यक वंश के बाद मगध पर शिशुनाग वंश का शासन स्थापित हुआ. शिशुनाग वंश का कार्यकाल 413 – 345 ईसा पूर्व तक रहा. उसके बाद मगध पर नंद वंश का शासन कायम हुआ, जिन्होंने 345 – 322 ईसा पूर्व तक शासन किया. नंद वंश के शासनकाल में मगध का काफी विस्तार भी हुआ और यह साम्राज्य पूरे उत्तर भारत में स्थापित हो गया. लेकिन इसके शासकों की अवधि बहुत कम रही और अंतत: मौर्य वंश का मगध पर कब्जा हो गया. नंद वंश के अंतिम शासक धनानंद थे जिनसे मदद की गुहार चाणक्य ने लगाई थी, लेकिन धनानंद ने उनका अपमान करके उन्हें राजदरबार से निकाल दिया था, जिसके बाद चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को तैयार किया और उसकी मदद से नंद वंश का अंत करके मौर्य वंश की स्थापना की.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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