क्या वुमनाइजर है मोनोजित मिश्रा? आरजी कर अस्पताल कांड के दोषी के लिए मांगी थी फांसी की सजा

Kolkata Law College Rape Case : मोनोजित मिश्रा, जिसके फेसबुक प्रोफाइल पर लिखा है क्रिमिनल लाॅयर वह खुद एक गंभीर आपराधिक मामले का मुख्य आरोपी बन गया है. मोनोजित मिश्रा पर साउथ कोलकाता के लॉ कॉलेज की एक छात्रा ने गैंगरेप का आरोप लगाया है और कहा है कि उसने उसके साथ हैवानियत की है, जबकि उसने उसके पैर पकड़कर खुद को छोड़ने की गुहार लगाई थी. मोनोजित मिश्रा वह शख्स है, जो बलात्कारियों के लिए फांसी की सजा मांग चुका है, अब सवाल यह है कि उसके साथ क्या होगा?

Kolkata Law College Case : साउथ कोलकाता के लॉ कॉलेज में एक छात्रा के साथ हुई गैंगरेप की घटना के बाद गिरफ्तारियों का दौर जारी है. इस केस में मुख्य आरोपी मोनोजित मिश्रा, जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी की गिरफ्तारी पहले ही हो गई थी और अब सिक्यूरिटी गार्ड की भी गिरफ्तारी हो गई है. मेडिकल रिपोर्ट में भी इस बात के प्रमाण मिल चुके हैं कि छात्रा के साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाए गए थे. मोनोजित मिश्रा टीएमसी का नेता है और उसने अपने सोशल मीडिया एकाउंट से आरजी कर अस्पताल में हुए रेप केस के दौरान दोषी को मौत की सजा देने की मांग सोशल मीडिया पर की थी.

मोनोजित मिश्रा पर पहले भी लग चुके हैं छेड़खानी और दुर्व्यवहार के आरोप

मोनोजित मिश्रा पर साउथ कोलकाता के लॉ कॉलेज की छात्रा ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है और उसका यह कहना है कि मोनोजित मिश्रा ने ना सिर्फ उसके साथ रेप किया, बल्कि उसने उसका वीडियो भी बनाया और कहा कि अगर वो उसके बुलाने पर बाद में नहीं आई और इस घटना की जानकारी किसी को दी, तो वह उसके ब्वाॅयफ्रेंड और परिजनों को मार डालेगा. टाइम्स आॅफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार मोनोजित मिश्रा पर पहले भी कई आरोप लग चुके हैं, जिसमें छेड़खानी, दुर्व्यवहार और पैसों की उगाही के कई आरोप पहले भी लग चुके हैं. काॅलेज के अधिकारियों से इस बारे में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ था. यही वजह थी कि मोनोजित मिश्रा का खौफ पूरे काॅलेज में व्याप्त था. इस बारे में काॅलेज प्रशासन को जानकारी थी, लेकिन उसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाता था. इस वजह से मोनोजित का मन बढ़ा हुआ था और लड़कियों पर भद्दे कमेंट करता था और उन्हें शादी का प्रपोजल देता रहता था.

मोनोजित मिश्रा ने ओढ़ रखा है शराफत का नकाब

मोनोजित मिश्रा ने शराफत का नकाब ओढ़ रखा था, इसी वजह से जो लड़कियां उसकी सच्चाई नहीं जानती थीं, वे उसके झांसे में आ जाती थीं. मोनोजित मिश्रा अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी काफी सक्रिय हैं और उसने अपनी छवि एक क्रांतिकारी और जनता के लिए आगे आने वाले नेता की बना रखी है. कोलकाता में जब आरजी कर अस्पताल में एक ट्रेनी डाॅक्टर के साथ रेप और फिर उसकी हत्या की घटना सामने आई थी, तो मोनोजित मिश्रा ने 16 अगस्त को एक पोस्ट लिखा था, जिसमें उसने एक वीडियो पोस्ट किया था और यह मांग की थी कि बलात्कारियों को फांसी की सजा दी जाए. अब मोनोजित मिश्रा के सोशल मीडिया हैंडल पर कमेंट किया जा रहा है कि वे अब क्या करेंगे.

मोनोजित मिश्रा का साथ देने वाले दो लड़कों और गार्ड पर भी चलेगा केस

मोनोजित मिश्रा लॉ कॉलेज का पूर्ववर्ती छात्र था और वर्तमान में वह टीएमसी का नेता और कॉलेज का नाॅन टीचिंग स्टाॅफ भी है. अपने फेसबुक प्रोफाइल में उसने अपना परिचय क्रिमिनल लाॅयर का लगा रखा है. मोनोजित का साथ देने वाले दो वर्तमान छात्र जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी पर भी गैंगरेप का केस चलेगा क्योंकि उन्होंने क्राइम में साथ दिया है, भले ही उन्होंने लड़की के साथ रेप नहीं किया है. IPC की धारा 376D के तहत उन लोगों पर भी रेप का केस ही चलता है, जिन्होंने रेप में किसी भी तरह सहयोग किया हो. इस अपराध के लिए उसे 20 साल की न्यूनतम सजा या फिर उम्रकैद भी हो सकती है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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