लोबिन हेम्ब्रम बीजेपी के साथ, संताल में पार्टी को मिला लड़ाकू नेता कितना मिलेगा फायदा?

Jharkhand Politics : झामुमो के मुखर नेता रहे लोबिन हेम्ब्रम ने बीजेपी का दामन थाम लिया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि झामुमो में अब समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं रहा, इसलिए वे बीजेपी के साथ जा रहे हैं. वे हमेशा यह कहते रहे हैं कि झारखंड का गठन जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया गया, झामुमो ने उसपर काम नहीं किया. अब जबकि वे बीजेपी के साथ आ गए हैं, जानिए आगामी विधानसभा चुनाव में इसका क्या होगा असर.

Jharkhand Politics : झामुमो के पूर्व विधायक और पार्टी से निष्कासित नेता लोबिन हेम्ब्रम ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया है. बीजेपी ज्वाइन करने से कुछ देर पहले प्रभात खबर के साथ बातचीत में लोबिन हेम्ब्रम ने कहा कि मैं झामुमो से नाराज होकर बीजेपी ज्वाइन नहीं कर रहा हैूं,बल्कि कुछ समय से जिस तरह के लोग पार्टी में एक्टिव हो गए हैं और चाटुकारिता की राजनीति कर रहे हैं, उससे पार्टी को बहुत नुकसान हो रहा है. सीएम हेमंत सोरेन भी उन्हीं लोगों के साथ खड़े हैं, पार्टी में आज समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं है, चाहे वो नया हो या पुराना सबका अपमान हो रहा है, इसलिए मैं पार्टी छोड़ रहा हूं.

शुरू से बागी रहे हैं लोबिन हेम्ब्रम

लोबिन हेम्ब्रम झामुमो के ऐसे नेता है, जिन्होंने हमेशा विरोधी रुख रखा और कई मुद्दों पर अपनी ही पार्टी को लताड़ा. लोबिन हेम्ब्रम ने अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री को हमेशा सवालों के घेरे में रखा है और यह आरोप भी लगाया कि जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए झारखंड का गठन हुआ था, वो अब तक संभव नहीं हुआ है.  लोबिन हेम्ब्रम ने हमेशा कहा कि हेमंत सरकार आदिवासियों के हित की बात तो करती है, लेकिन सीएनटी, एसपीटी और पेसा एक्ट के बावजूद आदिवासियों की जमीन हड़पी जाती है. आदिवासी हमेशा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है. 

लोबिन हेम्ब्रम ने बागी रुख अपनाते हुए कई बार सरकार के खिलाफ आंदोलन भी किए. उन्होंने हमेशा यह कहा कि सरकार अपने उद्देश्यों से भटक गई है. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान लोबिन हेम्ब्रम बागी हो गए और राजमहल संसदीय क्षेत्र से इन्होंने पार्टी के उम्मीदवार विजय हांसदा का विरोध करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा. इस बागी तेवर की वजह से उन्हें पार्टी से निलंबित भी कर दिया गया था और 25 जुलाई को दल-बदल कानून के तहत उन पर कार्रवाई हुई और उनकी विधानसभा की सदस्यता को रद्द कर दिया गया था. राजमहल सीट से चुनाव लड़ने के दौरान उन्होंने यह दावा किया था कि क्षेत्र में ना तो बीजेपी का और ना ही झामुमो नेता विजय हांसदा का कोई प्रभाव है और वे चुनाव जीत जाएंगे, लेकिन परिणाम उनके दावे के विपरीत आया.

लोबिन हेम्ब्रम साहिबगंज जिले के बोरियो विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक चुने गए हैं. वे शिबू सोरेन के करीबी नेताओं में से एक हैं और इन्होंने झारखंड आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी.

Also Read : क्या ‘झारखंड टाइगर’ खा सकते हैं जेएमएम का वोट बैंक, कोल्हान में कितनी मजबूत होगी बीजेपी?

क्या राहुल गांधी ने बदल दी है अपनी रणनीति, किसे कर रहे हैं टारगेट?

चंपई के बाद अब लोबिन क्या होगा प्रभाव?

पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बीजेपी में शामिल होने के एक ही दिन बाद लोबिन हेम्ब्रम भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं. शिबू सोरेन के करीबी नेता रहे चंपाई सोरेन और लोबिन हेम्ब्रम द्वारा बीजेपी का दामन थामने पर झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जाने दीजिए, जिसको जहां जाना है जाए. क्या दिक्कत है, पार्टी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. 

वहीं बीजेपी नेता बिरंची नारायण ने कहा कि लोबिन हेम्ब्रम के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी को इसका फायदा मिलेगा. वे एक मुखर नेता हैं और शिबू सोरेन के साथ इन्होंने एक तरह से झामुमो को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. जिस तरह से झामुमो के दिग्गज नेता उसका साथ छोड़कर जा रहे हैं, ऐसा प्रतीत होता है कि झामुमो ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा. 

उन्होंने कहा कि लोबिन हेम्ब्रम ने हमेशा विधानसभा में भी आदिवासी हित की बातों को मुखरता से उठाया. उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों की ओर भी लगातार सरकार का ध्यान आकर्षित करवाया है. जिस प्रकार आदिवासी बहन बेटियों के साथ संताल परगना में दुराचार हो रहा है और उनके साथ भय और प्रलोभन के जरिए शादी की जा रही है और उनका धर्मांतरण कराया जा रहा है, ऐसे में आदिवासी यानी सरना जोकि हिंदू हैं उनकी रक्षा सिर्फ और सिर्फ बीजेपी कर सकती है, इस बात को समझते हुए लोबिन हेम्ब्रम बीजेपी के साथ आएं हैं. मैं उनका पार्टी में स्वागत करता हूं और बधाई देता हूं.

प्रभात खबर के कार्यकारी संपादक अनुज सिन्हा कहते हैं कि झारखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक है, उससे पहले नेताओं के पाला बदलने का दौर चलता है. पहले चंपाई सोरेन बीजेपी में शामिल हुए हैं आज लोबिन हेम्ब्रम शामिल हुए. बीजेपी नेता कुणाल षाड़ंगी भी पाला बदल चुके हैं, जहां तक लोबिन हेम्ब्रम के बीजेपी में शामिल होने की बात है तो यह कोई चौंकाने वाला फैसला नहीं है. लोबिन एक तरह से पहले से ही बीजेपी के साथ थे, वे एक विरोधी स्वर वाले नेता रहे हैं. लोबिन को संताल के आक्रामक नेता के रूप में जाना जाता है, लेकिन इनका प्रभाव क्षेत्र पूरा संताल नहीं है.

लोबिन के बीजेपी में शामिल होने के प्रभाव की अगर बात करें तो यहां गौर करने वाली बात यह है कि संताल के लोग बदलाव को जल्दी स्वीकार करते नहीं हैं, यह बात पहले भी प्रमाणित हुई है जब स्टीफन मरांडी, साइमन मरांडी और हेमलाल मुर्मू जैसे नेता पार्टी छोड़कर गए थे. लोबिन हेम्ब्रम आंदोलन से जुड़े नेता हैं और उनका अपने क्षेत्र में काफी सम्मान भी है. सबसे बड़ी बात यह है कि बीजेपी के पास संताल परगना में कोई लड़ाकू नेता नहीं है, वे लोबिन हेम्ब्रम का उपयोग संताल में इस कमी को पूरा करके करेंगे. 

Also Read :चंपाई सोरेन के बाद अब लोबिन हेम्ब्रम भी BJP में शामिल, बोले- JMM नहीं, नेता से नाराजगी

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >