Imran Khan : सेना से पंगा का परिणाम , इमरान खान पर हाई ट्रेजन लगाने की तैयारी ; जानिए क्या है ये एक्ट

Imran Khan Latest News : क्या पाकिस्तान से वहां के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की खबर जल्दी ही आ सकती है? यह सवाल इसलिए क्योंकि वहां इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, कभी इमरान खान की मौत की खबर आती है, तो कभी अदालत के आदेश के बावजूद उनकी बहनों को मिलने नहीं दिया जाता है. मीडिया पर अंकुश है और डाॅन जैसा अखबार भी इमरान से संबंधित खबरों को कवरेज देने में सौ बार सोच रहा है. इमरान खान पर हाई ट्रेजन लगाने की तैयारी हो चुकी है और उनके समर्थकों को पीटा जा रहा है. पाकिस्तान के लिए इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं.

Imran Khan Latest News : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और क्रिकेटर इमरान खान अदियाला जेल, रावलपिंडी में कैद हैं. 9 दिसंबर को उनकी बहनों को कोर्ट के आदेश के बावजूद उनसे मिलने नहीं दिया गया. जब वे धरना पर बैठ गईं, तो उनपर पानी के फौव्वारे छोड़े गए. उनकी बहनों के साथ ही उनके समर्थकों में भी दहशत है कि क्या इमरान खान स्वस्थ हैं? इसकी वजह यह है कि वहां के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर लोकतंत्र की हत्या करने की पूरी साजिश कर चुके हैं और जो भी उनके रास्ते में आएगा, उन्हें हटा दिया जाएगा.

इमरान खान पर हाई ट्रेजन लगाने की तैयारी शुरू, जानिए क्या है ये?

पाकिस्तान के राजनीतिक हालात अभी बहुत बिगड़े हुए हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जो जेल में हैं, उनपर हाई ट्रेजन लगाने की तैयारी हो रही है और साथ ही PTI के कई नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है. हाई ट्रेजन एक ऐसा अपराध है, जो देशद्रोह के केस से भी गंभीर माना जाता है. इसमें राज्य के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध) के तहत मामला चलाया जाता है. पाकिस्तानी कानून के अनुसार हाई ट्रेजन पनिशमेंट एक्ट 1973 के अनुसार मौत या फिर आजीवन कारावास की सजा सुाई जाती है. इसे बहुत ही गंभीर अपराध माना जाता है, जिसे देश के साथ गद्दारी से जोड़कर देखा जाता है. इस अपराध के तहत संविधान को निलंबित करना, देश की सुरक्षा को खतरे में डालना जैसे अपराध शामिल हैं

क्या पाकिस्तान में इस तरह की घटना पहली बार हो रही है?

इमरान खान की बहनें


पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्रियों के साथ दुर्व्यवहार और उन्हें फांसी पर चढ़वाने तक का इतिहास रहा है. लोकतांत्रिक ढंग से चुना हुआ कोई भी प्रधानमंत्री जब सेना के खिलाफ हो जाता है, तो वहां इसी तरह की स्थिति उत्पन्न होती है. पाकिस्तान, कहने के लिए तो एक लोकतांत्रिक देश है और वहां स्वतंत्र न्यायपालिका है, लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तान में सेना सर्वोपरि है.

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क्या पाकिस्तान में सेना के हस्तक्षेप की वजह से कई प्रधानमंत्रियों का तख्तापलट हो चुका है ?

पाकिस्तान में सेना के हस्तक्षेप की वजह से कई प्रधानमंत्रियों का तख्तापलट हो चुका है और उन्हें जेल में भी रहना पड़ा है. इनमें जुल्फिकार अली भुट्टो, बेनजरी भुट्टो, नवाज शरीफ और शाहिद खाकान अब्बासी जैसे प्रधानमंत्रियों को तख्तापलट की वजह से जेल जाना पड़ा.जुल्फिकार अली भुट्टो को तो रावलपिंडी जेल में ही रखा गया था और बाद में उन्हें फांसी दे दी गई. जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी और पाकिस्तान में दो बार प्रधानमंत्री रही बेनजरी भुट्टो के साथ ऐसा ही हुआ था. उनपर केस चलाए गए, निर्वासन हुआ और अंतत: एक कार्यक्र में रावलपिंडी में उनकी हत्या कर दी गई. हुसैन सुहरावर्दी जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे थे उनकी भी गिरफ्तारी सेना के आदेश पर हुई थी.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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