पानीपत के युद्ध में इब्राहिम लोदी को पस्त कर बाबर ने भारत में मुगलों का साम्राज्य स्थापित किया

Delhi Elections : दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर दिल्ली को नया मुख्यमंत्री मिलेगा. वह मुख्यमंत्री अगर आम आदमी पार्टी का नहीं हुआ, तो दिल्ली में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन होगा, जो यहां के इतिहास में कई बार हो चुका है. दिल्ली सल्तनत के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी के बाद दिल्ली पर मुगलों का शासन हो गया था. इब्राहिम लोदी को उसके अपने ही लोगों ने धोखा दिया था और उसके शासन का अंत हुआ था.

Delhi Elections : दिल्ली के इतिहास में इब्राहिम लोदी की चर्चा बहुत ही अहम है. इब्राहिम लोदी दिल्ली सल्तनत का आखिरी शासक था और उसकी हार के बाद देश में मुगलों का शासन प्रारंभ हुआ. मुगल शासक बाबर ने पानीपत के युद्ध में इब्राहिम लोदी को मार दिया था, जिसके बाद लोदी वंश का अंत हो गया. इतिहासकारों का मानना है कि इब्राहिम लोदी ने अपनी नीतियों से अपनी छवि एक तानाशाह की बना ली थी, जिसकी वजह से उसका पतन हुआ.

कौन था इब्राहिम लोदी

इब्राहिम लोदी, लोदी वंश के शासक सिकंदर खान का बेटा था. इब्राहिम लोदी 1517 ईसवी में सुल्तान बना था. वह अपने पिता और दादा की तरह शिक्षित और योद्धा था. लेकिन उसे अपने ही लोगों से काफी विरोध का सामना करना पड़ा. इसकी वजह यह थी कि उसने अपने उम्रदराज सरदारों की जगह युवा लोगों को कमान सौंप दी थी, जो उसके विश्वासपात्र थे. इब्राहिम लोदी के इस फैसले से लोगों में काफी नाराजगी फैल गई थी और उसके सरदारों ने उसके खिलाफ विद्रोह कर दिया था. जब 1526 में बाबर ने उसपर आक्रमण किया, तो उसे दो तरफा मार पड़ी और वह संभल नहीं सका, युद्ध में उसकी हार हुई और लोदी वंश का सूर्य अस्त हो गया.

इब्राहिम लोदी को क्रूर और तानाशाह क्यों कहा गया है?

सुल्तान इब्राहिम लोदी, एआई तस्वीर

बहलोल लोदी का पोता इब्राहिम लोदी काफी घमंडी और क्रूर माना जाता था. वह अपने फैसलों में किसी को शामिल नहीं करता था, इसलिए उसकी छवि एक तानाशाह की बन गई थी.वह पश्तून लोदी जनजाति का था. लोदी वंश का शासनकाल 1451 से 1526 के बीच तक चला और इसके तीन शासक हुए. इब्राहिम लोदी का पिता सिकंदर लोदी काफी लोकप्रिय शासक था, लेकिन इब्राहिम लोदी उसकी जगह नहीं ले सका. उसे समाज के लोगों की स्वीकार्यता नहीं मिली, खासकर अमीर वर्ग के लोग इब्राहिम लोदी को शंका की नजरों से देखते थे. इब्राहिम लोदी इसी शंका की वजह से किसी पर विश्वास नहीं कर पाता था और जल्दबाजी में उनके खिलाफ बदले की भावना से काम करता था. हालांकि वह एक शिक्षित और संभ्रात शासक था, लेकिन उसकी इसी आदत ने उसे घमंडी और क्रूर का तमगा दिला दिया था. उसके साम्राज्य के रईस यह चाहते थे कि राज्य इब्राहिम लोदी के भाई जलाल खान को मिले या फिर साम्राज्य का बंटवारा हो जाए.

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दौलत खान ने किया था विश्वासघात

इब्राहिम लोदी के अंत का सबसे बड़ा कारण बना था दौलत खान, जो पंजाब का सूबेदार था. उसने इब्राहिम लोदी के साथ विश्वासघात किया और बाबर का साथ दिया. इब्राहिम लोदी के लिए यह बहुत क्षति थी और वह इस विश्वासघात से बच नहीं सका. इब्राहिम लोदी के दरबारियों ने ही एक तरह से बाबर को इब्राहिम लोदी से युद्ध करने के लिए निमंत्रित किया था, ताकि लोदी वंश का अंत हो जाए. इब्राहिम लोदी युद्ध के दौरान मारा गया था, उसके अलावा दिल्ली सल्तनत का कोई भी राजा युद्ध में नहीं मारा गया था. 

बाबर ने इब्राहिम लोदी  को तुलगमा युद्ध विधि से हराया 

बाबर की सेना के आगे इब्राहिम लोदी की सेना टिक नहीं सकी. बाबर ने पानीपत के युद्ध में इब्राहिम लोदी के खिलाफ तुलगमा विधि से हराया था. तुलगमा विधि युद्ध की एक रणनीति है, जिसका प्रयोग बाबर ने इब्राहिम लोदी के खिलाफ किया था. इस विधि में विपक्ष की सेना को चारों ओर से घेर लिया जाता है. सेना को तीन भागों में बांटा जाता है–दाएं, बाएं और मध्य. युद्ध की इस नीति में बाएं और दाहिने हिस्से की सेनाएं पहले आगे बढ़ती हैं और बीच की सेना थोड़ा पीछे रहती है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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