जस्टिस संजीव खन्ना ने बंद किया मॉर्निंग वॉक, जानिए क्या हैं चीफ जस्टिस से जुड़े प्रोटोकाॅल

Chief Justice Sanjiv Khanna : देश के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के बारे में मीडिया में जैसे ही यह खबर आई कि प्रोटोकाॅल की वजह से उन्होंने अपना प्रिय शौक मॉर्निंग वॉक बंद कर दिया, आम आदमी की रुचि उन नियमों को जानने में हो गई है, जिसके तहत जस्टिस संजीव खन्ना ने यह निर्णय लिया. चीफ जस्टिस के तमाम प्रोटोकाॅल उनकी सुरक्षा और न्यायपालिका की स्वतंत्रता से जुड़े हैं.

Chief Justice Sanjiv Khanna : देश के चीफ जस्टिस बनते ही जस्टिस संजीव खन्ना की जीवन शैली में बड़ा बदलाव आ गया है, उदाहरण के तौर पर अब वे मॉर्निंग वॉक पर नहीं जा रहे हैं. मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उन्हें मॉर्निंग वॉक के वक्त अपने साथ सिक्योरिटी गार्ड्‌स को लेकर जाना होगा. जस्टिस संजीव खन्ना बेहद ही सामान्य जीवनशैली जीते हैं इसलिए उन्होंने गार्ड्‌स के साथ सुबह की सैर करने की बजाय अपने रूटीन में ही बदलाव कर लिया है.

भारत के मुख्य न्यायाधीश को लेकर क्या है प्रोटोकाॅल

भारत के मुख्य न्यायाधीश को लेकर कोई भी लिखित प्रोटोकाॅल सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है. यह एक तरह का गोपनीय दस्तावेज माना जाता है. हां, यह जरूर है कि मुख्य न्यायाधीश को लेकर जो भी नियम-कायदे बनाए गए हैं उनका उद्देश्य उन्हें सुरक्षित रखना और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखना है. 

क्या हैं चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की शक्तियां

भारत का मुख्य न्यायाधीश एक प्रतिष्ठित पद होने के साथ ही उनपर कई तरह की जिम्मेदारियां भी होती हैं. सुप्रीम कोर्ट को संविधान का संरक्षक माना जाता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारियां बहुत महत्वपूर्ण है. चीफ जस्टिस को मास्टर ऑफ द रोस्टर कहा जाता है. यह उनके अधिकारों को बताता है. मुख्य न्यायाधीश के पास यह अधिकार है कि वह अपने हिसाब से मामलों की सुनवाई के लिए पीठ तय करे. वह सुप्रीम कोर्ट के कार्य के घंटे और छुट्टियां भी तय करते हैं.

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मुख्य न्यायाधीश बनने के लिए क्या है योग्यता

शपथ लेते हुए जस्टिस संजीव खन्ना

भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है. चीफ जस्टिस बनने के लिए कुछ योग्यताएं निर्धारित हैं, जिनके आधार पर ही कोई व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस बन सकता है. 

  • – भारत का नागरिक होना अनिवार्य है.
  • -हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में 5 साल का कार्यानुभव होना चाहिए
  • -अधिवक्ता के रूप में 10 साल का कार्यानुभव हो
  • -राष्ट्रपति की नजर में वह विधिवेत्ता यानी कानून का जानकार हो.

छह माह बाद रिटायर हो जाएंगे जस्टिस संजीव खन्ना

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार चीफ जस्टिस संजीव खन्ना 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बने थे इससे पहले वे दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश थे. 17 जून 2023 से 25 दिसंबर 2023 तक उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष का पद संभाला है. 11 नवंबर 2024 को जस्टिस संजीव खन्ना ने देश के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है. उनका जन्म 14 मई 1960 को हुआ है. इनकी स्कूल और काॅलेज की शिक्षा दिल्ली से हुई है. जस्टिस खन्ना ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही लाॅ की पढ़ाई की है और 1983 में दिल्ली बार काउंसिल के सदस्य बने. इनके पिता जस्टिस देवराज खन्ना दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश थे. चीफ जस्टिस संजीव खन्ना 13 मई 2025 को रिटायर हो जाएंगे.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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