रिटायरमेंट से पहले बुलडोजर एक्शन पर डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनाया फैसला, ‘पत्नी, पति की संपत्ति नहीं’ के फैसले में भी थे शामिल

Chief Justice DY Chandrachud : भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल का 10 नवंबर अंतिम दिन है. उसके बाद वे सेवानिवृत्त हो जाएंगे, उनकी जगह जस्टिस संजीव खन्ना भारत के मुख्य न्यायाधीश बनेंगे, वे 11 नवंबर को चीफ जस्टिस का पदभार ग्रहण करेंगे. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने हिंदुस्तान टाइम्स से अपने रिटायरमेंट प्लान पर बात की है. एक सीजेआई जब रिटायर होता है तो लोगों की रुचि उनके रिटायरमेंट प्लान और ऐतिहासिक फैसलों में होती है.

Chief Justice DY Chandrachud :  जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश हैं और उन्होंने अपने कार्यकाल में कई अहम फैसले सुनाए हैं, यही वजह है कि आमलोग उनके रिटायरमेंट प्लान के बारे में जानना चाहते हैं. क्या वे सार्वजिनक जीवन में रहेंगे हैं या फिर वे निहायत ही निजी जीवन जीएंगे? हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बात करते हुए डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया है कि एक चीफ जस्टिस को जनता हमेशा उसी रूप में देखती है, इसलिए उसे रिटायमेंट के बाद भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए. 

डीवाई चंद्रचूड़ ने पूरा किया दो वर्ष से अधिक का कार्यकाल

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के इतिहास में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 14वें ऐसे चीफ जस्टिस हैं जिन्होंने दो साल से अधिक का कार्यकाल पूरा किया. भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मंडकोलाथुर पतंजलि शास्त्री पहले ऐसे जस्टिस थे, जिन्होंने दो साल 139 दिन का कार्यकाल पूरा किया था. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 2016 सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे और और 9 नवंबर 2022 में वे मुख्य न्यायाधीश बने थे. 

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के पांच बड़े फैसले

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का फेयरवेल

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल पर नजर डालेंगे तो उन्होंने कई अहम फैसले चीफ जस्टिस के पद पर रहते हुए सुनाए, जिनका व्यापक प्रभाव पड़ा. अपने फेयरवेल पर उन्होंने भाषण दिया और यह भी कहा कि जो लोग उन्हें ट्रोल करते थे वो अब बेरोजगार हो जाएंगे.

1. आर्टिकल 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा : चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय बेंच ने यह फैसला सुनाया कि सरकार द्वारा आर्टिकल 370 को निरस्त करना सही था, क्योंकि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने का प्रावधान संविधान में एक अस्थायी व्यवस्था थी.

2. चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक बताने का फैसला : जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पांच सदस्यीय बेंच की अध्यक्षता करते हुए चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक बताया और यह कहा इस योजना को लागू करने के लिए संविधान में जो संशोधन किए गए हैं वो असंवैधानिक हैं, इसलिए बैंक तत्काल इस बांड को बेचना बंद करें. चुनावी बांड को बैंक से खरीदा जा सकता था, जिसके जरिए राजनीतिक दलों को फंडिंग की जाती थी. 

3. बुलडोजर मामला : सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ अपना निर्णय सुनाया और कहा कि कोई व्यक्ति अगर दोषी है, तो  बुलडोजर एक्शन उचित नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बुलडोजर एक्शन कानून के शासन में उचित नहीं है. सीजेआई के रूप में जस्टिस चंद्रचूड़ ने इसी मसले पर अपना अंतिम फैसला सुनाया और बुलडोजर एक्शन को मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया. इसके अलावा में कई अन्य महत्वपूर्ण मामलों के निर्णय में भी जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल रहे, हालांकि वे उस वक्त चीफ जस्टिस नहीं थे. जैसे निजता का अधिकार , समलैंगिकता को अपराधमुक्त करना, व्यभिचार को अपराध से मुक्त करना, अयोध्या विवाद और सबरीमाला विवाद जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे.

चीफ जस्टिस रिटायरमेंट के बाद क्या नहीं कर सकते?

संविधान के आर्टिकल 124 में सुप्रीम कोर्ट की आवश्यता और गठन पर फोकस किया गया है. इस आर्टिकल की धारा 124(7) में यह बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और अन्य जस्टिस कार्यकाल समाप्त होने यानी रिटायर होने के बाद भारत के किसी भी कोर्ट में वकालत नहीं कर पाएंगे. इस व्यवस्था का उद्देश्य जजों की प्रतिष्ठा को बरकरार रखना है. हालांकि जज सार्वजनिक सेवा कर सकते हैं और कई जज  राज्यपाल या सरकारी समितियों के सदस्य के रूप में काम करते हैं. 

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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