असम में हर साल बाढ़ आती है, लेकिन इस बार की स्थिति ने लोगों को चौंका दिया है. मौजूदा हालात को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में इतनी भीषण बाढ़ पहले कभी नहीं देखी.दावा किया जा रहा कि पिछले 60 सालों में इस बार स्थिति सबसे भयानक है. तो सवाल है कि आखिर इस बार (2026) असम में बाढ़ इतनी विनाशकारी क्यों साबित हुई? क्या इसकी वजह सिर्फ भारी बारिश थी या इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार थे?
60 साल बाद असम में भीषण तबाही!
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA), सरकारी विभाग के आपदा रिपोर्टिंग और सूचना प्रबंधन प्रणाली (DRIMS) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस बार करीब 7 लाख नागरिक इस आपदा की चपेट में हैं. राज्य के 12 जिले बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं. 856 गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है. हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो गई है.
बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 78 (मौत के आंकड़े मीडिया रिपोर्ट के आधार पर है ) लोगों की जान जा चुकी है. इनमें कई बच्चे भी शामिल हैं. हालांकि प्रशासन का मानना है कि जैसे-जैसे पानी घटेगा, नुकसान का वास्तविक आंकड़ा और सामने आ सकता है. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक लाख से अधिक लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है.
- हजारों लोगों को एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और स्थानीय प्रशासन की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया.
- सबसे ज्यादा तबाही ऊपरी असम के शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में हुई है.
- शिवसागर जैसे बड़े कस्बों में भी सड़कें और बाजार पूरी तरह जलमग्न हो गए.
Assam Flood Crisis Timeline : देखिए इन्फोग्राफिक
हालांकि कई जगहों पर पानी उतरना शुरू हो गया है, लेकिन राहत कार्य अब भी आसान नहीं है. इसकी वजह यह है कि बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में गाद (सिल्ट) छोड़ गया है, जिससे सड़कें और रास्तों पर कई फीट तक मिट्टी जम गया है. ऐसे में प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है.
हर साल बाढ़ आती है मगर इस साल इतनी तबाही क्यों ?
इस साल असम में आई बाढ़ सिर्फ भारी बारिश का नतीजा नहीं थी. विशेषज्ञों के मुताबिक यह कई प्राकृतिक और मानवीय कारणों के एक साथ सामने आने का परिणाम है. असम की भौगोलिक स्थिति, पड़ोसी राज्यों में हुई अत्यधिक बारिश, ब्रह्मपुत्र का बढ़ा जलस्तर और कमजोर बुनियादी ढांचे ने मिलकर इस आपदा को पहले से कहीं अधिक विनाशकारी बना दिया.
- इस बार असम में सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश हुई. वहीं नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भी तेज बारिश और क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाएं हुईं. पहाड़ों से बड़ी मात्रा में पानी तेजी से नदियों के जरिए असम के मैदानी इलाकों में पहुंचा, जिससे कई जगह अचानक बाढ़ जैसे हालात बन गए.
- ब्रह्मपुत्र पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी. ऐसे में सहायक नदियों का अतिरिक्त पानी उसमें समा नहीं पाया और निचले इलाकों से पानी की निकासी भी रुक गई. इसी वजह से कई इलाकों में लंबे समय तक पानी भरा रहा.
- आमतौर पर नदियां अलग-अलग समय पर उफान पर आती हैं, लेकिन इस बार दिखौ, दिसांग, धनसिरी और बुरी दिहिंग जैसी कई सहायक नदियां एक साथ उफन पड़ीं. इससे ऊपरी असम के कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई.
- ब्रह्मपुत्र हर साल हिमालय से बड़ी मात्रा में गाद और रेत लाती है. इससे नदी का तल उथला होता जाता है और उसकी पानी समेटने की क्षमता कम हो जाती है. नतीजा, थोड़ी ज्यादा बारिश में भी नदी किनारों से बाहर बहने लगती है.
- असम में बाढ़ से बचाव के लिए बने कई तटबंध दशकों पुराने हैं. इस बार तेज पानी का दबाव वे झेल नहीं पाए और कई जगह टूट गए. इसके बाद बाढ़ का पानी तेजी से गांवों और खेतों में फैल गया, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ गया.
- विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब कम समय में बहुत ज्यादा बारिश हो रही है. इससे नदियां अचानक उफान पर आ जाती हैं और लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता.
सरकार के सामने क्या है बड़ी चुनौतियां ?
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन असम के सामने असली चुनौती अब शुरू हुई है. राहत और बचाव अभियान के साथ लोगों को सामान्य जीवन में वापस लाना सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक लाखों लोग अब भी इस आपदा से प्रभावित हैं. फिलहाल सरकार इन प्रमुख चुनौतियों से जूझ रही है.
- गांवों तक पहुंचना
पानी उतरने के बाद भी कई इलाकों में राहत कार्य आसान नहीं हुआ है. शिवसागर जिले के नाजिरा और आसपास के क्षेत्रों में सड़कें कई फीट मोटी गाद और रेत से ढक गई हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया है. राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से सैकड़ों गांवों में खाद्यान्न, दवाइयां और जरूरी सामान एयरड्रॉप किया जा रहा है.
- साफ पेयजल और राहत शिविरों का प्रबंधन
बाढ़ के बाद सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चिंता है. हजारों विस्थापित लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं, जबकि भूजल स्रोत भी दूषित हो चुके हैं. ऐसे में PHED अस्थायी जल शुद्धिकरण संयंत्र, क्लोरीनयुक्त पानी और टैंकरों के जरिए पेयजल उपलब्ध कराने में जुटा है.
- किसानों की आजीविका पर असर
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न होने से धान सहित खरीफ की फसल को भारी नुकसान हुआ है. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने SLBC के साथ बैठक कर पात्र लाभार्थियों के लिए छह महीने के लोन मोरेटोरियम की घोषणा की है.
- टूटे तटबंध और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा
ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के ऊंचे जलस्तर से कई तटबंध, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं. सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि बढ़ाकर 9 लाख रुपये प्रति परिवार कर दी है. इसके अलावा प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता और छात्रों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें देने की घोषणा की गई है.
- महामारी रोकना
डॉक्टरों के मुताबिक, बाढ़ के बाद डायरिया, हैजा और अन्य जल जनित बीमारियों के साथ सर्पदंश का खतरा भी बढ़ जाता है. इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में मेडिकल टीमें और मोबाइल हेल्थ वैन तैनात की हैं. साथ ही ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, ओआरएस वितरण और एंटी-वेनम दवाओं की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि असम के लिए यह सिर्फ राहत और बचाव का मामला नहीं है. पुनर्वास, कृषि की बहाली, बुनियादी ढांचे की मरम्मत और भविष्य में ऐसी आपदाओं से नुकसान कम करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना भी उतना ही जरूरी होगा. सरकार इस आपदा निपटने के लिए अपने स्तर से प्रयास कर रही है. देखिए इन्फोग्राफिक
आखिर असम में हर साल बाढ़ क्यों आती है?
ये तो हो हुई इस साल की स्थिति, लेकिन सवाल है कि आखिर असम हर साल इस आपदा का शिकार क्यों होता है? विशेषज्ञों का मानना है कि असम में बाढ़ आने के कई कारण है.हालांकि बारिश के बाद पानी जिस तेजी से नदियों में पहुंचती है,उससे हालात और गंभीर हो जाती है.
इसे ऐसे समझिए...मान लीजिए ब्रह्मपुत्र एक बड़ी सड़क है और सहायक नदियां छोटी-छोटी गलियां हैं, यदि सभी गलियों का ट्रैफिक एक साथ मुख्य सड़क पर आ जाए तो क्या होगा? जाम लग जाएगा. इसी प्रकार, जब सभी सहायक नदियों का पानी एक साथ ब्रह्मपुत्र में आता है, तो नदी अपनी क्षमता से अधिक पानी नहीं संभाल पाती और आसपास के क्षेत्रों में फैल जाती है. देखिए इन्फोग्राफिक
क्या सिर्फ भारी बारिश ही जिम्मेदार है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आपदा के पीछे केवल भारी बारिश जिम्मेदार नहीं है. इसके साथ कई मानवीय और पर्यावरणीय कारण भी जुड़े हुए हैं. इनमें सबसे प्रमुख हैं,
- जंगलों की लगातार कटाई
- नदी घाटियों में अत्यधिक या अनियोजित खनन
- नदियों में बढ़ती गाद (सिल्ट) जल निकासी की कमजोर व्यवस्था
- जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक बारिश
इन सभी कारणों ने मिलकर बाढ़ के असर को कई गुना बढ़ा दिया. इसे और आसान तरीके से समझने के लिए देखिए इन्फोग्राफिक
पिछले एक दशक में बाढ़ से जनहानि और प्रभावित आबादी
पिछले एक दशक में असम में आई बाढ़ ने राज्य के लगभग सभी 30 से अधिक जिलों को प्रभावित किया है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, राज्य का लगभग 39.58% क्षेत्र (31.05 लाख हेक्टेयर) बाढ़ संभावित है। हर वर्ष 7 लाख से 55 लाख तक लोग बाढ़ से प्रभावित होते हैं, जबकि कृषि, सड़क, पुल, तटबंध और आवास को भारी नुकसान होता है. देखिए इन्फोग्राफिक
क्या असम में आने वाली बाढ़ को स्थायी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि असम जैसी भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में बाढ़ को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है. ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां हर मानसून में बड़ी मात्रा में पानी और गाद लेकर आती हैं. लेकिन बेहतर तटबंध, वैज्ञानिक नदी प्रबंधन, समय रहते चेतावनी, जल निकासी व्यवस्था और बाढ़ क्षेत्र की वैज्ञानिक प्लानिंग के जरिए जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. यानी चुनौती बाढ़ को रोकने की नहीं, बल्कि उसके साथ बेहतर तरीके से जीना सीखने की है.
