ट्रंप की मनमानी का असर अमेरिकी फेडरल बैंक पर पड़ा, जानिए कौन हैं इस्तीफा देने वाली गवर्नर एड्रियान कुग्लर

Adriana Kugler : अमेरिकी राष्ट्रपति अपने दूसरे कार्यकाल में बहुत ही आक्रामक हो गए हैं, ना सिर्फ दूसरे देशों के लिए बल्कि अपने देश में भी उनकी ऐसी छवि बनती जा रही है. एलन मस्क के साथ उनके विवाद के बाद अब वहां के केंद्रीय बैंक की गवर्नर एड्रियाना कुग्लर ने इस्तीफा दे दिया है. न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार यह इस्तीफा ट्रंप द्वारा फेड पर बनाए जा रहे दबाव की वजह से सामने आया है. कुग्लर की नियुक्ति जो बाइडेन ने की थी, उनके इस्तीफे से ट्रंप खुश हैं, क्योंकि उन्हें यह लग रहा है कि अब केंद्रीय बैंक उनके नियंत्रण में आ जाएगा.

Adriana Kugler : अमेरिका के केंद्रीय बैंड फेड(Federal Reserve) की गवर्नर एड्रियाना कुग्लर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस बात की जानकारी फेड की ओर से दी गई है. एड्रियाना कुग्लर ने अपना कार्यकाल समाप्त होने के पहले ही इस्तीफा दे दिया है. उनका इस्तीफा 8 अगस्त से प्रभावी होगा. एड्रियाना कुग्लर के इस्तीफे से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों में बड़ा बदलाव नजर आ सकता है.

एड्रियाना कुग्लर के इस्तीफे की वजह क्या है?

एड्रियाना कुग्लर का कार्यकाल अभी समाप्त नहीं हुआ था,लेकिन उन्होंने समय से पहले ही इस्तीफा दे दिया है. कुग्लर के इस्तीफे से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बहुत खुश हैं और उन्होंने यह कहा है कि कुग्लर के इस्तीफे से उन्हें फेड में किसी की नियुक्ति का मौका मिल गया है. दरअसल ट्रंप लगातार फेड के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल पर ब्याज दरों में कटौती के लिए दबाव बना रहे थे. उनका यह कहना था मौद्रिक नीति बहुत कठोर है और उसमें बदलाव की जरूरत है. फेड की स्वतंत्रता पर लगातार राष्ट्रपति के द्वार हमला किए जाने के बाद एड्रियाना कुग्लर का इस्तीफा आया है, हालांकि कुग्लर ने अपने इस्तीफे में कोई वजह स्पष्ट तौर पर नहीं बताया है.

कुग्लर के इस्तीफे का क्या होगा असर?

कुग्लर के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फेड के बोर्ड में अपने पसंद का व्यक्ति नियुक्त करेंगे, जो उनकी इच्छा के अनुसार ब्याज दरों में कटौती करेगा. साथ ही ट्रंप का फेड पर नियंत्रण भी स्थापित होगा, इसका प्रभाव यह होगा कि फेडरल रिजर्व की नीतियों में सीधा और गहरा बदलाव दिख सकता है. अमेरिका के जो वर्तमान राजनीति और आर्थिक हालत हैं उसे देखते हुए यह बदलाव काफी हद तक संभव है. अगर ऐसा हुआ तो उसका वैश्विक प्रभाव पड़ेगा और अगर ब्याज दरें घटाई गईं तो डालर का प्रभाव घटेगा और अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती है.साथ ही शुरुआत में निवेश बढ़ सकता है, लेकिन इसकी वजह से अमेरिका को नुकसान होगा.

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कौन हैं एड्रियाना कुग्लर?

एड्रियान कुग्लर फेड की गवर्नर हैं. उनकी नियुक्ति 2023 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने की थी. वे पहली स्पैनिश महिला हैं, जिन्हें फेड का गवर्नर बनने का मौका मिला था. एड्रियाना कुग्लर एक प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री है. उन्होंने मैकगिल यूनिवर्सिटी से बीए किया है और कैलिफार्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि ली है. कुग्लर ने 2011–13 में अमेरिकी श्रम विभाग में मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में काम किया और फिर विश्व बैंख में अमेरिकी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में कार्यरत रहीं. उनकी छवि एक ऐसे अर्थशास्त्री की है जो ब्याज दरों के मामले में संयमित रुख रखती है और उसमें तेज बढ़ातरी के बजाय उसे धीरे-धीरे बढ़ाने की पक्षधर हैं. उनके इस्तीफे से फेड पर राजनीतिक प्रभाव पड़ेगा.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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