40 Years of Prabhat Khabar : एनोस एक्का की पत्नी के नाम पर पता बदल-बदल कर खरीदी गई जमीन

40 Years of Prabhat Khabar : ग्रामीण विकास मंत्री एनोस एक्का की पत्नी मेनोन एक्का ने आदिवासियों की जमीन खरीदने के लिए फर्जी पते का इस्तेमाल किया है. छोटानागपुर काश्तारी अधिनियमन में निहित प्रावधानों के तहत आदिवासियों की जमीन बिक्री की अनुमति देने के लिए सरकारी अधिकारियों ने मंत्री की पत्नी के फर्जी पते को सही भी बता दिया.

40 Years of Prabhat Khabar : मधु कोड़ा की सरकार में ग्रामीण मंत्री रहे एनोस एक्का 2008 में अपनी आय से अधिक संपत्ति के मामले में काफी चर्चित रहे.  उन्होंने अपनी पत्नी मेनोन एक्का के नाम पर रांची और उसके आसपास के इलाकों में करोड़ों की संपत्ति खरीदी. उनपर जमीन कब्जाने का भी आरोप लगा. प्रभात खबर ने पूरे दस्तावेज के साथ उनके काले कारनामों पर रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसकी चर्चा पूरे देश में हुई. प्रभात खबर ने एनोस एक्का से बातचीत भी की थी और उनका पक्ष जानने की कोशिश की थी. एनोस एक्का ने प्रभात खबर के साथ बातचीत में कहा कि उनके पास जो कुछ भी है वो झारखंड में ही है, उन्होंने बाहर कुछ भी नहीं किया है. उनकी पत्नी के नाम पर कई प्लाॅट खरीदे गए, जिनमें उनका पता अलग-अलग था. इसपर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रभात खबर में छपी थी, पढ़िए यह खास रिपोर्ट-

05 जुलाई 2008: मंत्री होने का प्रिविलेज : पत्नी एक, पता अनेक

ग्रामीण विकास मंत्री एनोस एक्का की पत्नी मेनोन एक्का ने आदिवासियों की जमीन खरीदने के लिए फर्जी पते का इस्तेमाल किया है. छोटानागपुर काश्तारी अधिनियमन में निहित प्रावधानों के तहत आदिवासियों की जमीन बिक्री की अनुमति देने के लिए सरकारी अधिकारियों ने मंत्री की पत्नी के फर्जी पते को सही करार दे दिया. मंत्री की पत्नी ने ठेकेदार के रूप में निबंधन कराने के लिए अपना स्थायी पता ठाकुर टोली सिमडेगा व थाना रोड गुमला बताया है. इसी आवेदन में उन्होंने अपना वर्तमान पता अशोक नगर , रोड नंबर दो स्थित बलवीर विला बताया है. ओरमांझी थाना क्षेत्र में ननकु मुंडा वगैरह से जमीन खरीदने के लिए मेनोन एक्का ने अपना पता ओरमांझी थाना क्षेत्र का करमा गांव बताया.

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अंचल कार्यालय से जुड़े अधिकारियों ने जांच-पड़ताल के बाद मंत्री की पत्नी के इस फर्जी पते को सही करार दे दिया है. बाद में इसी आधार पर रांची के उप समाहर्ता ने जमीन हस्तांतरित करने की अनुमति दे दी. मंत्री की पत्नी को जमीन खरीदने की अनुमति देने के मामले में रांची के उप समाहर्ता ने सारी हदें पार कर दीं. ऐसा उन्होंने कलुवा मुंडा आदि की जमीन के हस्तांतरण करने की अनुमति देने के मामले में की. मंत्री की पत्नी ने ओरमांझी थाना क्षेत्र निवासी कलुवा मुंडा की जमीन खरीदने के दौरान अपना पता, मंत्री आवास, डोरंडा, थाना डोरंडा बताया था. इसके बावजूद उपसमाहर्ता ने मेनोन एक्का को 4.22 एकड़ जमीन खरीदने की अनुमति दे दी. 

रांची शहरी क्षेत्र में खरीदी गई जमीन का ब्यौरा

खाता नंबररकबा कहां है जमीन बाजार मूल्य
2240.09 डिसमिल सिरमटोली 90 लाख
225 2.07 एकड़ सिरमटोली 20.70 लाख
189 12 डिसमिल कोकर 12 लाख
189 17 डिसमिल कोकर 17 लाख
189 54 डिसमिल कोकर 54 लाख

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लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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