स्कूली शिक्षा और पोषण

Unesco-global-education-report : रिपोर्ट में जहां जलवायु परिवर्तन, वैश्विक संघर्ष और अस्थिरता के कारण बढ़ती खाद्य सुरक्षा चुनौतियों के बीच पोषणयुक्त भोजन की उपलब्धता को शिक्षा के लिए आवश्यक बताया गया है, वहीं भारत के संदर्भ में बताया गया है कि मध्याह्न भोजन योजना से स्कूलों में लड़कियों और वंचित वर्गों की उपस्थिति पर सकारात्मक असर पड़ा है.

Unesco-global-education-report : स्कूली शिक्षा में पोषण को महत्व देने से संबंधित यूनेस्को की ग्लोबल एजुकेशन रिपोर्ट (जीइएम) चौंकाती है, जिसके मुताबिक, दुनिया के मात्र 60 प्रतिशत देशों के ही स्कूलों में भोजन और पेय पदार्थ संबंधी मानक लागू हैं. रिपोर्ट बताती है कि कुल 187 देशों में से केवल 93 देशों में ही स्कूलों के भोजन और पेय पदार्थों पर कानून, अनिवार्य मानक या मार्गदर्शन हैं. हालांकि इनमें से केवल 29 प्रतिशत देशों में ही स्कूलों के भीतर खाद्य और पेय पदार्थों के विपणन को प्रतिबंधित करने के उपाय हैं, जबकि 60 फीसदी देशों में ही खाद्य और पेय पदार्थों को नियंत्रित करने वाले स्पष्ट मानक हैं.

स्कूलों में भोजन के प्रावधान पर एक अलग सर्वेक्षण से पता चलता है कि 72 फीसदी देशों में स्कूल परिसरों में खाद्य पदार्थों के विपणन पर किसी न किसी तरह की पाबंदी है. इसके अलावा इनमें से 52 फीसदी देशों में स्कूलों के पास खाद्य पदार्थों की बिक्री पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लागू है. इसके बावजूद रिपोर्ट में दो तथ्यों की ओर खासतौर पर ध्यान दिया जाना चाहिए. एक, अस्वास्थ्यकर भोजन या पेय पदार्थों की खपत कम करने पर जोर नहीं दिया गया है. दूसरा, स्कूली भोजन में विधायी सुधारों के बजाय व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर दिया गया है. यह भी पाया गया कि अधिकांश स्कूल भोजन कार्यक्रमों का उद्देश्य पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा उद्देश्यों के साथ-साथ शैक्षिक लक्ष्यों को प्राप्त करना था, लेकिन मोटापे से निपटने या इसकी रोकथाम पर कम ही ध्यान दिया गया.

रिपोर्ट में जहां जलवायु परिवर्तन, वैश्विक संघर्ष और अस्थिरता के कारण बढ़ती खाद्य सुरक्षा चुनौतियों के बीच पोषणयुक्त भोजन की उपलब्धता को शिक्षा के लिए आवश्यक बताया गया है, वहीं भारत के संदर्भ में बताया गया है कि मध्याह्न भोजन योजना से स्कूलों में लड़कियों और वंचित वर्गों की उपस्थिति पर सकारात्मक असर पड़ा है. निष्कर्ष के तौर पर रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य, पोषण, कृषि और खाद्य प्रणालियों सहित कई क्षेत्रों में शिक्षा और प्रशिक्षण के माध्यम से सभी स्तरों पर क्षमता निर्माण की आवश्यकता है.

स्पष्ट संबंध होने के बावजूद शिक्षा और पोषण के बीच संबंध अब भी कम ही खोजे गये हैं. रिपोर्ट में समग्र दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया गया है, जिसके तहत स्कूल में भोजन के प्रावधान को पोषण शिक्षा, शारीरिक गतिविधि और पाठ्येतर गतिविधियों के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए. जाहिर है, इस क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है.

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Published by: संपादकीय

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