रक्षा में आत्मनिर्भरता

इस पहल से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों की आयात पर निर्भरता घटेगी तथा घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा.

भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाले 780 वस्तुओं के आयात पर रोक लगा दी है. दिसंबर, 2023 से दिसंबर, 2028 के बीच चरणबद्ध तरीके से इसे लागू किया जायेगा. ये चीजें भारत में ही निर्मित की जायेंगी. उल्लेखनीय है कि यह तीसरी ऐसी सूची है. पिछले वर्ष दिसंबर और इस वर्ष मार्च में दो सूचियां जारी हुई थीं. आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के इस प्रयास के तहत 2500 चीजों का देश में उत्पादन हो रहा है तथा उनके आयात की अब कोई आवश्यकता नहीं है.

सूचियों में शामिल आयातित हो रहीं 458 वस्तुओं में से भी 167 का उत्पादन प्रारंभ हो चुका है. इस पहल से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों की आयात पर निर्भरता घटेगी तथा घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा. उल्लेखनीय है कि महामारी के दौर में दो वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया था.

रक्षा क्षेत्र में यह प्रयास पहले ही प्रारंभ हो गया था. कुछ समय पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यह जानकारी दी थी कि बीते चार-पांच वर्षों में रक्षा आयात लगभग 21 प्रतिशत कम हुआ है. आत्मनिर्भरता के लिए आयात घटाने के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. वित्त वर्ष 2021-22 में 13 हजार करोड़ रुपये मूल्य के रक्षा साजो-सामान दूसरे देशों को बेचे गये थे.

घरेलू रक्षा उद्योग में बढ़ोतरी का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि उक्त निर्यात का 70 प्रतिशत हिस्सा निजी क्षेत्र के उद्योगों ने उत्पादित किया था. केंद्र सरकार ने 2020 में पांच वर्षों में रक्षा निर्यात को 35 हजार करोड़ रुपये तक करने का लक्ष्य निर्धारित किया था. अनुमान है कि 2025 तक भारतीय रक्षा उद्योग 1.75 लाख करोड़ रुपये हो जायेगा. बढ़ती रक्षा आवश्यकताओं के कारण आठ वर्षों में बजट आवंटन भी बढ़ता रहा है.

आम तौर पर इस आवंटन का एक बड़ा हिस्सा आयात पर खर्च होता रहा है. पर अब विदेशी मुद्रा की बचत भी हो रही है तथा घरेलू उद्योगों का विकास भी हो रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने नौसेना के लिए 75 स्वदेशी तकनीकों और उत्पादों के विकास के कार्यक्रम की शुरुआत भी की है. अभी देश में 30 युद्धपोतों और पनडुब्बियों का निर्माण हो रहा है.

इस वर्ष के रक्षा बजट में घरेलू हथियारों की खरीद को बढ़ावा देने हेतु 68 प्रतिशत और शोध एवं विकास कार्यों हेतु निजी क्षेत्रों, नवउद्यमों तथा अकादमिक क्षेत्र के लिए 25 प्रतिशत पूंजी परिव्यय का प्रावधान किया गया है. आयात कम होने और निर्यात अधिक होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी सामरिक स्थिति में मजबूती आयेगी.

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