सुरक्षा का सवाल

Security Question: बांग्लादेश में भारत-विरोधी घटनाओं को देखते हुए सरकार को वहां कार्यरत राजनयिकों के परिजनों को सुरक्षा कारणों से स्वदेश लौटने की सलाह देनी पड़ी है, तो इसे समझा जा सकता है. वहां हिंदुओं पर हो रहे हमलों पर भारत चिंता और विरोध व्यक्त करता रहा है.

Security Question: बाग्लादेश में लगातार जारी भारत विरोधी हिंसा को देखते हुए सरकार ने वहां स्थित उच्चायोग और मिशनों में कार्यरत अधिकारियों के परिजनों को स्वदेश लौटने की सलाह दी है, तो इसे समझा जा सकता है. गौरतलब है कि बांग्लादेश में ढाका स्थित उच्चायोग के अतिरिक्त चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट स्थित मिशनों में भारतीय राजनयिक कार्यरत हैं. वहां भारतीय उच्चायोग खुले हैं और सभी पदों पर कर्मी कार्यरत हैं. दरअसल, चरमपंथी तत्वों की लगातार बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर ही सरकार ने अपने राजनयिकों और अधिकारियों के लिए बांग्लादेश को गैर-पारिवारिक गंतव्य बनाने का निर्णय लिया है.

पड़ोसी देश पाकिस्तान भी भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के लिए गैर-पारिवारिक गंतव्य है. अगस्त, 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही इस पड़ोसी देश के साथ भारत के रिश्ते तनावपूर्ण हो गये हैं. इसकी वजह वहां अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हो रहे हमले हैं. भारत इस पर चिंता और विरोध व्यक्त करता रहा है. पिछले साल जनवरी से दिसंबर तक वहां अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी 645 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं. पिछले महीने शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद वहां हालात तेजी से बिगड़े हैं.

भारत विरोधी माहौल तेज होने के अतिरिक्त वहां कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक भी हो गये हैं. बांग्लादेश के कई नेता पूर्वोत्तर भारत पर उकसाने वाली टिप्पणियां भी कर चुके हैं. पिछले महीने चटगांव में भारतीय मिशन के बाहर हिंसक प्रदर्शन भी हुए थे. उसके बाद भारतीय मिशनों की सुरक्षा को लेकर खतरे बढ़ने लगे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हाल ही में कहा था कि ‘हम लगातार चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और कारोबार पर बार-बार होने वाले हमलों का एक चिंताजनक सिलसिला देख रहे हैं.’

यह भारत विरोध वहां खेल में भी दिखाई दे रहा है, और वहां की क्रिकेट टीम ने टी-20 चैंपियनशिप में भारत आकर खेलने से इनकार कर दिया है. बांग्लादेश में संसदीय चुनाव आगामी 12 फरवरी को होने वाले हैं और उससे ठीक पहले नयी दिल्ली ने यह कदम उठाया है. एहतियात के तौर पर लिया गया यह फैसला बेशक अभी की खतरनाक स्थिति को देखते हुए है, लेकिन यह मानने का भी कारण है कि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होने पर इस फैसले की समीक्षा की जा सकती है.

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Published by: संपादकीय

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