एआइ को बढ़ावा जरूर दें, लेकिन समझदारी से

Artificial intelligence : आर्थिक सर्वेक्षण, 2025-26 में बताया गया है कि भारत के आकार और प्रति व्यक्ति आय उसके मुकाबले कम होने की वजह से भारतीय श्रम बाजार में एआइ का असर ज्यादा होगा.

Artificial Intelligence : भारत एआइ से होने वाले प्रौद्योगिकीय बदलाव को नजरअंदाज नहीं कर सकता, लेकिन एआइ टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ बड़ी कंपनियों के पास होने के साथ-साथ डाटा भी, जो इन बड़ी एआइ कंपनियों को मजबूत बना रहा है, हमारे जैसे विकासशील देशों से मिल रहा है. ऐसे में हम डिजिटल उपनिवेशीकरण के मूक दर्शक बने नहीं रह सकते. हालांकि, एआइ टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का नियंत्रण बना हुआ है, भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआइ ) के निर्माण और बड़े पैमाने पर पहचान-प्रमाणीकरण में एआइ/डाटा तकनीकों के उपयोग में विश्व स्तर पर अग्रणी भूमिका निभायी है.


जैम ट्रिनिटी, यानी जन धन बैंक अकाउंट, आधार और मोबाइल बैंकिंग की मदद से सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी), गरीबों के लिए घर और कई दूसरी कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रही है. हमें नये कानून भी मिले हैं, जैसे विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (विकसित भारत-जी राम जी) एक्ट, 2025, जो एआइ इंटीग्रेटेड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सरकारी योजना में भ्रष्टाचार कम करने में मदद कर रहे हैं. अस्पतालों में एआइ एक्स-रे, स्कैन और रिपोर्ट के विश्लेषण में तेजी से मदद कर रहा है.

जानलेवा बीमारियों का जल्दी पता लगाना और उनका अनुमान लगाना भी एआइ की वजह से मुमकिन हुआ है. हम एआइ समर्थित एप्स का इस्तेमाल कर अपनी रोजाना की शारीरिक गतिविधि को चला सकते हैं. रोजगार एआइ का एक बड़ा शिकार है, और सभी क्षेत्रों में नौकरियों का सफाया एक सच्चाई बन चुकी है. मीडिया, मनोरंजन, कॉल सेंटर और सॉफ्टवेयर क्षेत्र भी एआइ का असर झेलने लगे हैं. बड़ी फैक्ट्रियां एआइ समर्थित कंप्यूटर प्रोग्रामों की मदद से सामान बनाती हैं, जिससे भारी बेरोजगारी हो रही है.


आर्थिक सर्वेक्षण, 2025-26 में बताया गया है कि भारत के आकार और प्रति व्यक्ति आय उसके मुकाबले कम होने की वजह से भारतीय श्रम बाजार में एआइ का असर ज्यादा होगा. इसमें चेतावनी दी गयी है कि कंपनियों द्वारा एआइ को बिना सोचे-समझे अपनाने से सभी की हालत खराब हो जायेगी और देश की ग्रोथ क्षमता को नुकसान होगा. सर्वेक्षण में सरकार, निजी क्षेत्र और अकादमिक जगत के बीच और ज्यादा सक्रिय सहयोग की बात कही गयी है, ताकि एआइ से उत्पादकता बढ़े और ज्यादा से ज्यादा फैले. इसलिए नयी टेक्नोलॉजी को बिना सोचे-समझे नहीं अपनाना चाहिए. ऐसे में, एआइ के लिए सही विनियमन करने की जरूरत है.

स्वामित्व की दृष्टि से एआइ पर अमेरिका और चीन का दबदबा है, जबकि ज्यादातर उपयोगकर्ता भारत समेत विकासशील देश हैं, साथ ही वे इन एआइ प्लेटफॉर्म द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे डाटा का स्रोत भी हैं. भारत जैसे विकासशील देश विदेशी मालिकाना हक वाले एआइ प्लेटफॉर्म पर निर्भर बने हुए हैं और इस प्रक्रिया में डाटा संप्रभुता भी खो रहे हैं. इन टेक दिग्गजों के मालिकाना हक वाले एआइ के दबदबे की वजह से छोटे और कुटीर उद्योग, सेवा एंटरप्राइज और कर्मी नुकसान में हैं. हालांकि एआइ की अहमियत को देखते हुए इसे रोका नहीं जाना चाहिए, पर इसके विनियमन के महत्व को नकारा नहीं जा सकता. हमें इस टेक्नोलॉजी को समझदारी से बढ़ावा देने की जरूरत है.

गूगल और दूसरी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां, जो ज्यादातर अमेरिका और चीन की हैं, एआइ के लिए जरूरी ज्यादातर डाटा नियंत्रित करती हैं. ऐसी स्थिति छोटे खिलाड़ियों के लिए एंट्री में बड़ी रुकावटें पैदा करती है. अपनी कमियों के बावजूद एआइ के लाभों को देखते हुए नीति निर्माताओं के सामने चुनौती यह है कि एआइ कैसे समानता के साथ मानवता की सेवा कर सकता है. इसके लिए देश में एक मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआइ) की जरूरत है, जिसके माध्यम से आम लोगों के लिए, समानता के आधार पर एआइ तकनीकों का विकास और उपयोग सुगम बनाया जा सके.


अच्छी खबर यह है कि संचार क्रांति के कारण भारत के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क है. स्वदेशी 4-जी नेटवर्क का विस्तार लगभग पूरे देश में किया गया है और देश ने अपना स्वदेशी 5-जी नेटवर्क भी विकसित कर लिया है. भारत को सबसे सस्ते डाटा की भूमि होने का गौरव भी प्राप्त है. देश को स्वदेशी एआइ प्लेटफॉर्म्स की भी जरूरत है, जो केवल विदेशी तकनीकों पर निर्भर न हों, बल्कि देश के डाटा, भाषाओं, आवश्यकताओं और सुरक्षा हितों के अनुरूप एआइ के विकास, तैनाती और प्रबंधन के लिए स्वदेशी फ्रेमवर्क उपलब्ध करायें.

आखिर में डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम आज की जरूरत है, ताकि नागरिकों, व्यवसायों और सरकारों को एआइ, इसके उपयोग और इसके फायदों के बारे में बताया जा सके. साथ ही, हमें सही सरकारी नीति के जरिये विनियमन करने की भी जरूरत है, ताकि हम स्वस्थ एआइ को बढ़ावा दे सकें. इसलिए हमें विकास और विनियमन की दोहरी नीति अपनानी होगी, ताकि एआइ सबके लिए समानता से उपलब्ध हो और वह सबके भले के लिए काम करे.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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By प्रो अश्विनी महाजन

प्रो अश्विनी महाजन is a contributor at Prabhat Khabar.

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