प्रदूषण और डायबिटीज

प्रदूषण के डायबिटीज से संबंध को साबित करने वाली रिपोर्ट से यह भी समझा जा सकता है कि भारत में डायबिटीज मरीजों की बढ़ती संख्या की एक वजह बढ़ता प्रदूषण भी हो सकती है.

नवंबर का महीना आते ही हर साल की भांति इस वर्ष भी मीडिया में वायु प्रदूषण सुर्खियों में छाया है. प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, यह बात पहले से कही जाती रही है. इस बारे में भारत में हुए एक नये अध्ययन में बताया गया है कि इससे टाइप टू डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. यह कोई नया निष्कर्ष नहीं है. इसमें नयी बात केवल यह है कि प्रदूषण और डायबिटीज के बीच संबंध का जो संकेत पश्चिमी देशों और चीन में देखा गया था, वह भारत में भी पाया गया है. यह भारत में अपनी तरह का पहला अध्ययन है, जो दरअसल भारत में क्रॉनिक बीमारियों के बारे में 2010 में शुरू किये गये एक शोध का हिस्सा है.

क्रॉनिक बीमारियां उन्हें कहा जाता है, जिनमें लंबे समय तक दवाओं को खाने की जरूरत होती है. इनमें पहली रिपोर्ट डायबिटीज के बारे में आयी है. शोधकर्ताओं ने दिल्ली और चेन्नई में सात साल तक 12 हजार लोगों के स्वास्थ्य की निगरानी की. इसमें समय-समय पर प्रदूषण के सैटेलाइट डेटा के साथ-साथ उनके ब्लड शुगर के स्तर को मापा गया. उन्होंने पाया कि एक महीने तक प्रदूषण के अति सूक्ष्म पीएम 2.5 कणों के बीच रहने से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ गया. विस्तृत रिपोर्ट का सार यही है कि प्रदूषण से टाइप-2 डायबिटीज हो सकता है. डायबिटीज के दो प्रकारों में टाइप-2 ज्यादा सामान्य है. डायबिटीज में बहुत ज्यादा प्यास और पेशाब लगती है और थकावट होती है. साथ ही आंखोंं, दिल और नर्व संबंधी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं.

कुल मिलाकर डायबिटीज होने के बाद किसी भी व्यक्ति की जीवनशैली सामान्य नहीं रहती. इसका समय पर इलाज नहीं होने से स्थिति और गंभीर हो सकती है. शुगर और ब्लड प्रेशर बढ़ने से दिल की बीमारी भी हो सकती है. इस वर्ष जून में रिपोर्ट आयी थी कि भारत में 10 करोड़ लोग या आबादी के 11.4 प्रतिशत लोग डायबिटीज मरीज हैं. भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय के सर्वे में यह भी कहा गया था कि 13 करोड़ से ज्यादा लोग प्री-डायबिटीक अवस्था में हैं, यानी ऐसे लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो उन्हें कुछ वर्षों के भीतर डायबिटीज हो सकता है. टाइप-1 डायबिटीज को रोकना मुश्किल है.

लेकिन, टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को संतुलित खानपान और नियमित व्यायाम से कम किया जा सकता है. प्रदूषण के डायबिटीज से संबंध को साबित करने वाली रिपोर्ट से यह भी समझा जा सकता है कि भारत में डायबिटीज मरीजों की बढ़ती संख्या की एक वजह बढ़ता प्रदूषण भी हो सकती है. ऐसे में प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों की आवश्यकता पहले से भी अधिक जरूरी हो जाती है.

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