पाकिस्तान का यू-टर्न

पाकिस्तान कई मोर्चों पर मुश्किलों का सामना कर रहा है. पाकिस्तान में आर्थिक मुश्किलों के साथ ही राजनीतिक अस्थिरता का भी दौर चल रहा है.

पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. इस बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुबई के टेलीविजन चैनल अल अरबिया को दिये इंटरव्यू में भारत के साथ संवाद की इच्छा जतायी. उन्होंने कहा कि वे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ‘ईमानदार बातचीत’ चाहते हैं. शरीफ के इस इंटरव्यू के अभी कुछ घंटे भी नहीं बीते थे कि पाकिस्तान ने यू-टर्न ले लिया. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस इंटरव्यू पर एक स्पष्टीकरण जारी किया कि प्रधानमंत्री शरीफ ने स्पष्ट कहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये बिना बातचीत संभव नहीं है.

इस यू-टर्न ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत के साथ रिश्ते सुधारने में पाकिस्तानी सत्ता की दिलचस्पी नहीं है. पाकिस्तान कई मोर्चों पर मुश्किलों का सामना कर रहा है. पाकिस्तान में आर्थिक मुश्किलों के साथ ही राजनीतिक अस्थिरता का भी दौर चल रहा है. यह देश एक ऐसे दुष्चक्र में फंस गया है, जिससे तुरंत बाहर निकल पाना संभव नहीं दिखता है.

एक तरफ शहबाज शरीफ भारत से बातचीत करने की इच्छा रखते हैं, तो दूसरी तरफ उनके ही विदेश मंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण बयान दिया था. भुट्टो के बयान पर शहबाज शरीफ ने चुप्पी साध ली थी. इस चुप्पी पर पाकिस्तान के कई राजनीतिक विश्लेषकों ने चिंता जतायी थी. इधर, भारत में सत्ता और विपक्ष के कई नेताओं ने अपना विरोध प्रकट किया था.

पाकिस्तान अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख कर ही भारत से बात करना चाहता है. शरीफ के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार है जब उन्होंने संवाद की बात की है. पिछले तीन युद्धों ने पाकिस्तान को बेरोजगारी और गरीबी की तरफ धकेला है. उसकी माली हालत को जर्जर किया है. यह बात शहबाज शरीफ ने अपने इंटरव्यू में स्वीकार भी किया है.

बीते 75 वर्षों में पहली बार किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक रूप से इसे कबूला है. पाकिस्तान अब तक सिर्फ विदेशी मदद और कर्ज पर ही निर्भर रहता आया है. नतीजा, पाकिस्तान पर दुनिया का कर्ज लगभग 100 अरब डॉलर हो गया है. यदि पाकिस्तान भारत के साथ रिश्ते बेहतर करना चाहता है, तो उसे ईमानदार कोशिश करनी होगी. अपने यहां चल रही आतंक की नर्सरी बंद करनी होगी. उसे अपने आचरण से यह भरोसा दिलाना होगा कि वह दोनों देशों के बीच सार्थक संवाद करने को तैयार है.

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