नवोन्मेष रैंकिंग में भारत की उछाल

भारत में अनुसंधान व विकास संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों को नवोन्मेष केंद्र में तब्दील किया जा रहा है. यह बेहद अहम पहलकदमी है, क्योंकि नवोन्मेष के जरिये ही विविध समस्याओं का स्थायी समाधान ढूंढा जा सकता है.

तकनीक के लगातार बढ़ते उपयोग और उपभोग को देखते हुए विकास के लिए नवोन्मेष और नवाचार अत्यंत आवश्यक हो गये हैं. विगत कुछ वर्षों में हमारे देश ने नवोन्मेष के मामले में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसकी वजह से वैश्विक नवोन्मेष सूचकांक (जीआइआइ) की रैंकिंग में भारत चार पायदानों का सुधार करते हुए 48वें स्थान पर पहुंच सका है.

संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व बौद्धिक संपदा संगठन, कॉर्नेल विश्वविद्यालय और इनसीड बिजनेस स्कूल द्वारा जारी यह सूची 131 देशों के प्रदर्शन पर आधारित है. इस रैंकिंग को हर वर्ष प्रकाशित किया जाता है और यह 80 संकेतकों पर आधारित है, जिनमें बौद्धिक संपदा पेटेंट आवेदन से लेकर मोबाइल-एप्लीकेशन बनाना, शिक्षा पर व्यय और वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी प्रकाशन आदि शामिल हैं. चार पायदान का सुधार कर भारत मध्य और दक्षिण एशिया में नवोन्मेष के मामले में पहले स्थान पर आ गया है.

वैसे अभी भी इस सूची के 10 शीर्षस्थ स्थानों पर उच्च आयवाले देश हैं. स्विट्जरलैंड पिछले साल की तरह इस साल भी सर्वोच्च स्थान पर बना हुआ है, जबकि स्वीडन दूसरे स्थान पर और अमेरिका तीसरे स्थान पर है. ब्रिटेन एक पायदान सुधार कर चौथे स्थान पर आ गया है और नीदरलैंड एक स्थान फिसल कर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है. दक्षिण कोरिया ने पहली बार सर्वोच्च 10 देशों के बीच में अपनी जगह बनायी है और ऐसा करनेवाला वह दूसरा एशियाई देश है.

सूची में आठवें स्थान पर सिंगापुर है. जीआइआइ रैंकिंग में छठे स्थान पर डेनमार्क, सातवें स्थान पर फिनलैंड और नौवें स्थान पर जर्मनी है. इस सूची में भारत के साथ-साथ चीन, फिलीपींस और वियतनाम जैसे एशियाई देशों ने भी विगत सालों में उम्दा प्रदर्शन किया है.

इस बार चीन 14वें स्थान पर है. मध्य और दक्षिण एशिया में इस सूची में भारत जहां पहले स्थान पर है, वहीं ईरान और कजाखिस्तान क्रमशः दूसरे एवं तीसरे स्थान पर हैं. गरीब देशों में जीआइआइ रैंकिंग के मामले में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा नवोन्मेषवाली अर्थव्यवस्था माना गया है. भारत ने विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा निर्धारित सभी मानकों में उल्लेखनीय सुधार किया है.

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, सेवाओं का निर्यात, सरकारी ऑनलाइन सेवाओं, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग में स्नातकों की संख्या तथा अनुसंधान और विकास से जुड़े वैश्विक संस्थानों एवं नवाचार जैसे मानकों में भारत दुनिया के सर्वोच्च 15 देशों में शामिल है. भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान, मुंबई और दिल्ली, भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु जैसे संस्थानों और शीर्ष विज्ञान पर आधारित प्रकाशनों के बलबूते भारत यह उपलब्धि प्राप्त कर सका है.

इस रैंकिंग में 131 देशों में नवोन्मेष के मोर्चे पर किये जा रहे कार्यों का विश्लेषण किया गया है. इसके मानकों में शैक्षिक संस्थानों एवं वहां किये जा रहे अनुसंधान से जुड़े कार्य, मानव पूंजी व अनुसंधान, आधारभूत संरचना की स्थिति, बाजार एवं कारोबारी कृत्रिमता, ज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं रचनात्मक उत्पादन आदि शामिल हैं.

भारत में भी 2019 में राज्यों की ऐसी रैंकिंग की गयी थी, जिसमें कर्नाटक शीर्ष स्थान पर रहा था. उसके बाद क्रमश: तमिलनाडु और महाराष्ट्र थे, जबकि बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ सूची में सबसे नीचे थे. भारत नवोन्मेष सूचकांक 2019 को वैश्विक नवोन्मेष सूचकांक के अनुरूप तैयार किया गया था, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की नये आविष्कारों को लेकर माहौल एवं उनकी कोशिशों पर गौर किया गया था.

उस राष्ट्रीय सूची में निवेश आकर्षित करने के मामले में भी कर्नाटक पहले स्थान पर था. उसके बाद क्रमश: महाराष्ट्र, हरियाणा, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का स्थान था. उस रैंकिंग का निर्धारण बड़े राज्य, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश आदि मानकों के आधार पर हुआ था, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में सिक्किम शीर्ष पर था, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली का स्थान पहला था.

पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में उम्दा प्रदर्शन करनेवालों में मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा शामिल थे, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में लक्षद्वीप, दिल्ली और गोवा थे. नवोन्मेष सूचकांक की मदद से सतत विकास के लिये जरूरी मानकों को चिह्नित करने में मदद मिलती है. इस रिपोर्ट के अनुसार प्रभावी नीति बनाने के लिये क्षेत्रीय स्तर पर नवोन्मेष की स्थिति को समझना जरूरी है.

केवल राष्ट्रीय स्तर पर इस नीति को लागू करना पर्याप्त नहीं है. प्रत्येक राज्य को अपने संसाधनों और विशेषताओं या खूबियों के आधार पर अपनी नीति तैयार करनी चाहिए. नवोन्मेष हमेशा से बदलाव और प्रगति का अगुवा रहा है, क्योंकि इससे पुरानी और कुंद पड़ चुकी गतिविधियां खत्म होती हैं.

निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि विकास को गति देने के लिये भारत में नवोन्मेष की संस्कृति को विकसित करना जरूरी है. इसी वजह से भारत में अनुसंधान व विकास संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों को नवोन्मेष केंद्र में तब्दील किया जा रहा है. यह बेहद अहम पहलकदमी है क्योंकि नवोन्मेष के जरिये ही विविध समस्याओं का स्थायी समाधान ढूंढा जा सकता है.

देश में बढ़ते प्रदूषण स्तर, विभिन्न हिस्सों में गहराते जल संकट, तेजी से खत्म होते प्राकृतिक संसाधनों के भंडार, जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों, खाद्य पदार्थों की बर्बादी आदि समस्याओं का समाधान नवोन्मेष की मदद से खोजा जा सकता है.

posted by : sameer oraon

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