ईरान के साथ खड़ा भारत

India Iran Relation: पश्चिमी देशों के दबाव में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा ईरान के खिलाफ लाये गये मानवाधिकार उल्लंघन के प्रस्ताव के विरोध में वोट देकर भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि विदेश नीति के मामले में वह बाहरी शक्ति या विदेशी दबावों के आगे नहीं झुकता.

India Iran Relation: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा ईरान के खिलाफ लाये गये मानवाधिकार उल्लंघन के प्रस्ताव के विरोध में वोट देकर भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति तथा ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों के बारे में जता दिया है. पश्चिमी देशों द्वारा लाया गया यह प्रस्ताव दरअसल ईरान में पिछले साल के अंत में शुरू हुए देशव्यापी प्रदर्शनों से संबंधित था, जिसमें मानवाधिकार हनन का आरोप लगाया गया. प्रस्ताव में ईरान सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर अत्यंत बल प्रयोग और गिरफ्तारियों की निंदा की गयी और एक फैक्ट फाइंडिंग मिशन का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया गया. इस मिशन को ईरान में पिछले महीने हुए विरोध प्रदर्शनों की जांच का अधिकार दिया गया है.

हालांकि यह संयुक्त राष्ट्र का कोई नियमित सत्र नहीं था, बल्कि परिषद की ओर से ईरान में बिगड़ती मामवाधिकार की स्थिति को संबोधित करने के लिए बुलाया गया एक विशेष सत्र था, जिसे भारत ने अनावश्यक माना. भारत के अलावा चीन और पाकिस्तान ने भी प्रस्ताव के विरोध में वोट दिया. कुल 47 देशों में से 25 ने प्रस्ताव के पक्ष में, तो सात देशों ने प्रस्ताव के विरोध में वोट दिये, जबकि 14 देश गैरहाजिर रहे. प्रस्ताव के विरोध में वोट देकर भारत ने दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि विदेश नीति के मामले में वह बाहरी शक्ति या विदेशी दबावों के आगे नहीं झुकता. भारत का यह रुख नया नहीं है.

अतीत में भी भारत ने कभी किसी देश के खिलाफ लाये गये प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है, क्योंकि वह किसी देश के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करता. इसके अलावा भारत ने इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा लाये गये ईरान में मानवाधिकार हनन के प्रस्तावों का समर्थन नहीं किया है. इसके बावजूद इस मोड़ पर भारत के ईरान के साथ खड़े होने का महत्व है, क्योंकि ईरान में जारी अस्थिरता पर ट्रंप प्रशासन का रुख बेहद सख्त है. ईरान के साथ संबंध बनाये रखना भारत के हित में है.

सिर्फ यही नहीं कि ईरान से हम कच्चे तेल का आयात करते हैं, बल्कि चाबहार बंदरगाह के रणनीतिक महत्व को देखते हुए भी, जिसे भारत ने विकसित किया है, तेहरान के साथ सामान्य संबंध बनाये रखना आवश्यक है. ईरान के राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के फैसले का शुक्रिया अदा करते हुए कहा है कि यह रुख न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति नयी दिल्ली की प्रतिबद्धता के बारे में बताता है.

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