चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, जापान को पीछे छोड़ने को लेकर पढ़ें खास लेख

Fourth Largest Economy India : चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनते ही सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 40 पैसे मजबूत हो गया. आइएमएफ से लेकर विश्व बैंक तक ने लगातार बताया है कि दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के कमतर प्रदर्शनों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती जारी रहने वाली है.

Fourth Largest Economy India : कुल जीडीपी में जापान को पीछे छोड़कर भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, जो इस उथल-पुथल भरे समय में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. यह उपलब्धि भारत की वैश्विक भूमिका, उसकी आर्थिक नीतियों और नागरिकों के सामूहिक परिश्रम का नतीजा है. चार ट्रिलियन यानी 4,000 अरब डॉलर की जीडीपी वाला भारत अब एक स्थापित वैश्विक आर्थिक ताकत है, क्योंकि सिर्फ अमेरिका, चीन और जर्मनी ही अर्थव्यवस्था के आकार के हिसाब से भारत से आगे हैं.

ऐसे में, ठीक ही कहा जा रहा है कि मौजूदा आर्थिक नीतियां यदि जारी रहीं, तो भारत अगले कुछ वर्ष में जर्मनी को पीछे छोड़ विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण है. भारत ने यह गौरव तब हासिल किया है, जब अमेरिकी टैरिफ के चलते दुनियाभर में आशंका बनी हुई है और ट्रंप भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इस बीच पाक प्रायोजित आतंकवाद का हमने करारा जवाब दिया है. उसके बाद हमारे कूटनीतिक मिशन दुनियाभर में पाकिस्तान की असलियत बताने के लिए गये हुए हैं. सिर्फ यही नहीं कि आर्थिक मोर्चे पर इस उपलब्धि से भारत के प्रति दुनिया की धारणा और बेहतर होगी, बल्कि वैश्विक निवेशकों का भारत के प्रति भरोसा भी और बढ़ेगा.

चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनते ही सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 40 पैसे मजबूत हो गया. आइएमएफ से लेकर विश्व बैंक तक ने लगातार बताया है कि दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के कमतर प्रदर्शनों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती जारी रहने वाली है. भारत दुनिया में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था भी है. चूंकि अभी भारत कुल जीडीपी के आधार पर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है, लिहाजा भविष्य में प्रतिव्यक्ति आय और दूसरे मानकों पर भी हमें यह उपलब्धि हासिल करनी होगी.

आयात पर निर्भरता कम करने के अलावा सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. इन सबके लिए प्रशासन, इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निरंतर आर्थिक सुधारों की जरूरत पड़ेगी. इसका भी ध्यान रखना होगा कि आर्थिक शक्ति बनने का लाभ देश के गरीब तबके को मिले. तभी हम वास्तविक रूप से आर्थिक शक्ति होंगे.

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