स्वास्थ्य सेवा में सुधार

आयुष्मान भारत योजना तथा प्रधानमंत्री जन औषधि योजना से बड़ी संख्या में गरीब लोगों का मुफ्त उपचार हो रहा है तथा सभी वर्गों को सस्ती दवाइयां सुलभ हो रही हैं.

संसाधनों के अभाव तथा महंगे उपचार के कारण गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का लाभ देश की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा नहीं उठा पाता है. इस समस्या के समाधान के लिए बीते वर्षों में सरकार की ओर से अनेक पहलें की गयी हैं, जिन्हें आगे भी जारी रखा जाना है. कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उचित ही रेखांकित किया है कि जब गरीब लोगों को सस्ता और सबसे अच्छा उपचार हासिल होता है, तो शासन व्यवस्था में उनका भरोसा मजबूत होता है.

उन्होंने कहा कि इसी बात को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य क्षेत्र की सभी योजनाएं लागू की गयी हैं. हालांकि आवंटन बढ़ने और ठीक से योजनाओं को लागू करने से स्थिति में सुधार है, लेकिन अभी भी भारत उन देशों की श्रेणी में हैं, जहां स्वास्थ्य सेवा में सार्वजनिक खर्च का अनुपात बहुत ही मामूली है. हमारे देश में यह सकल घरेलू उत्पादन का लगभग डेढ़ प्रतिशत है, जिसे आगामी कुछ वर्षों में 2.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है.

सरकारी खर्च कम होने से इलाज का बोझ लोगों की जेब पर पड़ता है. अध्ययन बताते हैं कि हर साल लाखों लोग अस्पतालों के खर्च की वजह से गरीबी की चपेट में आ जाते हैं. इस स्थिति में आयुष्मान भारत योजना तथा प्रधानमंत्री जन औषधि योजना से करोड़ों लोगों को राहत मिली है. हर साल लाखों गरीब लोगों की गंभीर बीमारियों का मुफ्त उपचार हो रहा है तथा सभी वर्गों को सस्ती दवाइयां सुलभ हो रही हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया है कि इस प्रकार लोग करोड़ों रुपये की बचत कर पा रहे हैं. महामारी के अनुभव से हमें सीख मिली है कि पूरे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधन मुहैया कराये जाने चाहिए ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े. इस दिशा में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर योजना तथा स्वास्थ्य केंद्र खोलने की योजना महत्वपूर्ण प्रयास हैं.

जिला और प्रखंड स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलने से लोगों को बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा. भारत समेत समूची दुनिया में स्वास्थ्य के क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. कोरोना काल में इसने अपनी उपयोगिता को प्रभावी ढंग से सिद्ध भी किया है. भारत सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन की शुरुआत की है.

इसके तहत मरीजों को अतिरिक्त सुविधाएं मिल सकेंगी और डिजिटल डाटा होने से दूर-दराज के इलाकों, गांवों और कस्बों के लोग भी महानगरों के विशेषज्ञों की सलाह का लाभ उठा सकेंगे. स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक बड़ी चुनौती डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है.

इसमें सुधार के लिए वर्तमान मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने और नये चिकित्सा संस्थान स्थापित करने पर जोर दिया जा रहा है. हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज बनाने का लक्ष्य है. इससे जल्दी ही हमें समुचित संख्या में चिकित्सक मिलने लगेंगे. पर, जैसा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है, हमें स्वस्थ रहने पर ध्यान देना चाहिए ताकि अस्पताल जाने की नौबत ही न आये.

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Published by: संपादकीय

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