भारत की प्रशंसा में एफएटीएफ

FATF : एफएटीएफ ने खासकर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (2018) को संपत्तियों की वसूली और प्रबंधन का एक प्रभावी और व्यापक मॉडल बताया है.

FATF : पेरिस स्थित वैश्विक निगरानी संस्था एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग समेत विभिन्न वित्तीय अपराधों के माध्यम से हासिल की गयी सार्वजनिक संपत्तियों की वसूली में भारत के कानूनी प्रयासों और इडी (प्रवर्तन निदेशालय) की कार्रवाइयों की सराहना की है. एफएटीएफ दरअसल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण जैसे अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक मानक निर्धारित करता है. अपने यहां जब विपक्ष इडी पर सवाल उठा रहा है, और सुप्रीम कोर्ट तक ने कई बार इडी के कामकाज पर नाराजगी जतायी है, तब एफएटीएफ ने इसके काम की तारीफ करते हुए इसे वैश्विक मॉडल बताया है.

जो एफएटीएफ आतंकी वित्तपोषण के लिए पड़ोसी पाकिस्तान को जब-तब कठघरे में खड़ा करता है, उसने कई उदाहरणों के जरिये भारतीय एजेंसी के कामकाज की तारीफ की है. ‘एसेट रिकवरी गाइडेंस एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज’ शीर्षक वाली 340 पृष्ठों वाली एफएटीएफ की रिपोर्ट में विभिन्न परिस्थितियों के तहत करोड़ों रुपये की संपत्ति की जब्ती और घोटाले व धोखाधड़ी करने के बाद देश से भाग गये लोगों से निपटने के लिए अपनाये गये देश के मनी लॉन्ड्रिंग-रोधी तंत्र का हवाला दिया गया है. रिपोर्ट में धोखाधड़ी से हासिल संपत्तियों को जब्त करने के लिए ईडी द्वारा की गयी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांचों पर प्रकाश डाला गया है. बेशक इसमें शामिल पक्षों की पहचान उजागर नहीं की गयी है, लेकिन एफएटीएफ ने कथित रोज वैली पोंजी धोखाधड़ी के पीड़ितों की संपत्ति वापस दिलाने से संबंधित केस स्टडीज का हवाला दिया है.

इसके अलावा रिपोर्ट में अमेरिका से भारत को प्राप्त एक ड्रग तस्करी मामले के लिए अनुरोध भी शामिल है, जिसमें ईडी ने 130 करोड़ रुपये के बिटकॉइन (क्रिप्टो करेंसी) जब्त किये थे. इसमें कथित निवेश धोखाधड़ी के पीड़ितों को 6,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति वापस दिलाने के लिए केंद्रीय एजेंसी और आंध्र प्रदेश पुलिस व सीआइडी द्वारा किये गये आपसी समन्वय के मामले का भी जिक्र है. एफएटीएफ ने भारत के पीड़ित केंद्रित संपत्ति पुनर्वसूली मॉडल और तकनीक, वित्तीय डाटा विश्लेषण और एजेंसियों के बेहतर तालमेल की सराहना की है. एफएटीएफ ने खासकर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (2018) को संपत्तियों की वसूली और प्रबंधन का एक प्रभावी और व्यापक मॉडल बताया है. इस वैश्विक संस्था के मुताबिक, भारत का यह मॉडल दुनिया के अन्य देशों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है.

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