India France Relations : फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान मुंबई में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट हुई. दोनों नेता जिस गर्मजोशी से मिले, उससे दोनों देशों के रिश्तों की गहराई पता चली. इस दौरान मैक्रों ने दोनों देशों के संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा दिया. मैक्रों की इस यात्रा के दौरान भारत-फ्रांस के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज समेत 20 से अधिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते भी हुए. हालांकि इस दौरान रक्षा क्षेत्र में हुए समझौते, जिनमें हैमर मिसाइलों के भारत में उत्पादन और इसके लिए भारतीय कंपनी बीइएल और फ्रांस की कंपनी सैफरान के बीच हुआ समझौता, बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मैक्रों का यह भारत दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभी कुछ दिनों पूर्व ही हमने यूरोपीय संघ के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर किया है, जो काफी विस्तारित समझौता है. इस समझौते में फ्रांस की बड़ी भूमिका रही है और उम्मीद है कि हमें आगे भी फ्रांस की मदद मिलती रहेगी. इस समय दुनिया जिस बहुपक्षीय, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, साथ ही, दुनिया को व्यापार और आर्थिक जगत में जिस तरह की चुनौतियाें का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे समय में भारत-फ्रांस दोस्ती बहुत आवश्यक है. दोनों देशों के बीच के रिश्ते इसलिए भी गहरे हो रहे हैं, क्योंकि दोनों देश लोकतांत्रिक हैं, सो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों एक-दूसरे के लोकतांत्रिक मूल्यों को समझते हैं और उसे महत्व भी देते हैं. दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साझा कदम उठाने की बात भी कही है, जो दुनियाभर में बढ़ते आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है.
मैक्रों भारत में चल रहे एआइ समिट में शामिल होने आये हैं, इससे पहले फ्रांस में हुए समिट में प्रधानमंत्री मोदी भी वहां जा चुके हैं. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस में भी फ्रांस भारत का पार्टनर है. भारत चाहता है कि एआइ के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर उसकी एक पहचान बने, ताकि हमारे युवाओं को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिले. यह भी सच है कि आज की वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए हमारे युवा भारत में ही काम करना चाह रहे हैं. ऐसे में, एआइ में आगे बढ़ने से युवाओं को भारत में ही अच्छा मौका मिलेगा. इसके साथ ही, भारतीयों की क्षमता से भी दुनिया वाकिफ है और कई देश हमारे युवाओं को अपने यहां बुलाना चाहते हैं. ऐसे में, मुझे लगता है कि भारतीय युवाओं के लिए अमेरिका ने जो रास्ते बंद किये हैं, उसकी भरपाई उन्हें फ्रांस और यूरोप के अन्य देशों में हो जायेगी. हां, युवाओं को दूसरी भाषाएं सीखने के लिए थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, पर मौके उन्हें मिलेंगे.
मैक्रों का यह दौरा दिखाता है कि वे चाहते हैं कि भारत के साथ उनके रिश्ते मजबूत हों, क्योंकि पहले से ही फ्रांस यूरोप में भारत का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है. हालांकि इस समय मैक्रों की अपनी घरेलू लोकप्रियता कम है, परंतु यदि वह भारत को साथ लेकर चलते हैं, जो इस समय वैश्विक दक्षिण का नेता बनकर उभरा है, तो उन्हें न केवल घरेलू स्तर पर अपनी लोकप्रियता बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि वैश्विक स्तर के भी कई मामलों में उन्हें अग्रणी भूमिका निभाने का मौका मिल सकता है. इसे मैक्रों भी बखूबी समझ रहे हैं.
यहां राफेल समझौते का जिक्र भी जरूरी है. गौरतलब है कि 114 अतिरिक्त राफेल खरीदने का रास्ता भारत सरकार द्वारा लगभग साफ कर दिया गया है. अगले कुछ महीनों में राफेल सौदों पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है. हम सब जानते हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है और वह भारत विरोधी कोशिश में भी लगा रहता है. ऐसे में, आतंकवाद पर नकेल कसने तथा अपने रक्षा क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए यह बहुत आवश्यक है कि हम फ्रांस के साथ और राफेल खरीद के समझौते करें. यह भी सब जानते हैं कि पाकिस्तान की पीठ पर अमेरिका और चीन खड़े हैं.
हालांकि, रूस और ईरान के साथ भी हमारी दोस्ती बहुत गहरी है, लेकिन इन दोनों देशों पर दबाव बहुत ज्यादा है, इसलिए हमारे लिए नये मित्र बनाना भी आवश्यक है. मैक्रों के भारत दौरे के दौरान फ्रांस से न केवल 114 राफेल 4.5 वर्जन खरीदने की बात हुई है, बल्कि भारत ने यह भी कहा है कि वह 50 प्रतिशत राफेल का उत्पादन भारत में ही करना चाहता है. इसके लिए तकनीक स्थानांतरण पर भी बातचीत हुई है, ताकि हम उसे अपने देश में ही बना सकें. हल्के लड़ाकू विमानों और इंजन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने से भी हमें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
विदित हो कि रक्षा उपकरणों के निर्माण में वृद्धि करने का भारत का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ, इन उपकरणों को वैश्विक दक्षिण के देशों को निर्यात करना भी है. दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत जिन रक्षा उपकरणों का उत्पादन कर रहा है, जैसे पिनाका रॉकेट सिस्टम, उसकी खरीद के लिए फ्रांस ने दिलचस्पी दिखाई है और यह बड़ी बात है. यदि फ्रांस इस रॉकेट सिस्टम को खरीदता है, तो इससे हमारे निर्यात को बढ़ावा तो मिलेगा ही, हमारी रक्षा शक्ति भी बढ़ेगी. इसके साथ ही, दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता भी कम होगी.
मैक्रों की इस यात्रा के दौरान 10 वर्षों के रक्षा सहयोग समझौते के नवीनीकरण पर भी हस्ताक्षर किये गये. महत्वपूर्ण खनिज के लिए भी साझेदारी हुई है, विदेश मंत्रियों के वार्षिक संवाद का मंच बन रहा है, तथा फ्रांस के सैनिकों की भारतीय सेना में और भारतीय सेना की फ्रांस की सेना में तैनाती की भी बात हुई है, जो अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है. इससे दोनों देश चुनौतियों से साथ मिलकर लड़ने में सक्षम हो सकेंगे. कुल मिलाकर, मैक्रों का भारत दौरा और भारत के साथ समझौते होने से भारत को पहली बार ऐसा लग रहा है कि भारत और फ्रांस, यूरोप और वैश्विक दक्षिण दोनों को साथ मिलाकर आगे बढ़ सकते हैं.
अंत में, फ्रांस के साथ भारत का समझौत सही समय पर हुआ है, क्योंकि जिस तरह की नयी चुनौतियां उभरकर दुनिया के सामने आ रही हैं, उसमें भारत और फ्रांस का साथ मिलकर चलना बहुत अच्छा रहेगा. अभी फ्रांस में जी-7 समिट होना है और भारत में ब्रिक्स समिट होना है. यह भी सच है कि इस समय विश्व में नये समीकरण निकलकर सामने आ रहे हैं, जिसमें दोनों देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. दोनों देशों के बीच निरंतर आपसी बातचीत होते रहना बहुत जरूरी है और इसमें मैक्रों का भारत दौरा बहुत अहम है.
(बातचीत पर आधारित)
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)
