आर्थिकी में तेज सुधार की आस

आर्थिकी में तेज सुधार की आस

सतीश सिंह

मुख्य प्रबंधक, आर्थिक अनुसंधान विभाग, भारतीय स्टेट बैंक, कॉरपोरेट केंद्र, मुंबई

satish5249@gmail.com

वर्ष 2020 के अंतिम मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर को 4 प्रतिशत पर यथावत रखा गया. रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत और स्थायी सीमांत सुविधा (एमएसएफ) व बैंक दर को भी 4.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया. मुद्रास्फीति के उच्च स्तर को देखते हुए नीतिगत दर को यथावत रखने का निर्णय लिया गया. चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में 7.5 प्रतिशत गिरावट का अनुमान है.

पहले रिजर्व बैंक ने 9.5 प्रतिशत गिरावट का अनुमान लगाया था. जीडीपी वृद्धि दर के तीसरी तिमाही में 0.1 प्रतिशत के साथ सकारात्मक दायरे में लौट आने की आस है, जबकि चौथी तिमाही में इसमें 0.7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति तीसरी तिमाही में 6.8 प्रतिशत व चौथी तिमाही में 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है.

आरबीआइ ने सर्दियों में महंगाई दर में कमी आने की उम्मीद जतायी है. कारण है रबी के फसलों के बंपर उत्पादन होने का अनुमान. रबी की बुवाई का रकबा बढ़ने से 2020-21 में कृषि उत्पादन में इजाफा होगा, जिससे श्रमिकों की मांग भी बढ़ेगी. केंद्रीय बैंक का मानना है कि आपूर्ति पर महंगाई का दबाव है, लेकिन आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने और माॅनसून के ठीक रहने से महंगाई नियंत्रण में आ जायेगी. चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कॉरपोरेट आय में इजाफा से पता चलता है कि मांग में सुधार हो रहा है, जिससे मुनाफे में भी वृद्धि हो रही है.

आरबीआइ ने कहा है कि वित्तीय बाजार व्यवस्थित तरीके से काम कर रहे हैं. वाणिज्यिक व सहकारी बैंक 2019-20 का मुनाफा अपने पास ही रखेंगे और वित्त वर्ष के लिये लाभांश का भुगतान नहीं करेंगे. ऐसा करने से बैंक की पूंजी बढ़ेगी और वे ज्यादा ऋण दे सकेंगे. आरटीजीएस प्रणाली आगामी कुछ दिनों में पूरे सप्ताह, चौबीसो घंटे काम करने लगेगी. जनवरी 2021 से कार्ड से संपर्क रहित लेन-देन की सीमा 2000 रुपये से बढ़ाकर 5000 कर दी जायेगी. इससे कारोबारियों को कारोबार करने में सुविधा होगी.

शिकायतों के निपटारे में विलंब होने पर ग्राहकों को मुआवजा देने की व्यवस्था करने की बात भी मौद्रिक समीक्षा में कही गयी है. तीसरी तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का भी असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश में आर्थिक गतिविधियों में सुधार देखा जा रहा है. अक्तूबर में कार, दोपहिया व तिपहिया के साथ ट्रैक्टरों की बिक्री भी बढ़ी है, जो लोगों की आय में वृद्धि को दर्शाता है.

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए भारत निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है. वर्ष 2020-21 की पहली छमाही में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वार्षिक आधार पर 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. आरबीआइ ने हाल ही में अक्तूबर के लिये क्षेत्रवार ऋण वृद्धि का आंकड़ा जारी किया है. इसके अनुसार, उद्योग को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों में ऋण वृद्धि दर में वृद्धि हुई है. हालांकि यह वृद्धि पिछले वर्ष सितंबर से कम है, लेकिन तालाबंदी के नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए इन आंकड़ों को उत्साहजनक माना जा सकता है.

सबसे अधिक ऋण वृद्धि वैयक्तिक ऋण क्षेत्र में हुई है. फरवरी 2020 में 348 बिलियन की ऋण वृद्धि से कहीं अधिक ऋण वृद्धि अक्तूबर में हुई है. गृह, वाहन और दूसरे वैयक्तिक ऋण की भी मांग बढ़ रही है. उपभोक्ता टिकाऊ ऋण क्षेत्र में सितंबर महीने तक नकारात्मक वृद्धि हुई थी. खाद्य तेल, पैकेजिंग, एफएमसीजी, फार्मा, सीमेंट, स्टील, कंज्यूमर ड्यूरेबल आदि क्षेत्रों में भी तेज वृद्धि हुई है.

रिजर्व बैंक द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को काल और नोटिस बाजार में कारोबार की अनुमति देने से उन्हें नकदी के बेहतर प्रबंधन का अवसर मिलेगा. अभी उनके पास मियादी जमा, सरकारी प्रतिभूति, नाॅन-एसएलआर प्रतिभूति आदि जमा के स्रोत हैं, जिस कारण अक्सर उन्हें नकदी की कमी का सामना करना पड़ता है.

बीते सालों आइएल एंड एफएस एवं दीवान हाउसिंग लिमिटेड आदि पर आये संकट के कारण एनबीएफसी की साख को भारी धक्का लगा था, जिसका एक महत्वपूर्ण कारण कमजोर ऑडिट व्यवस्था थी. इसी कारण आरबीआइ ने मौद्रिक समीक्षा में रिस्क बेस्ड इंटर्नल ऑडिट (आरबीआइए) को एनबीएफसी के लिए भी अनिवार्य कर दिया है. बैंकों में यह व्यवस्था 2002 से लागू थी. वित्तीय नवाचारों के साथ ही विवेकपूर्ण ढंग से एनबीएफसी क्षेत्र का विकास बहुत जरूरी है.

वित्तीय स्थिरता, जमाकर्ताओं के निवेश का संरक्षण व भरोसे को बनाये रखना, उनकी जरूरतों का ख्याल रखना, दूर-दराज के क्षेत्रों में विकास की रफ्तार बनाये रखना आदि एनबीएफसी के समक्ष बड़ी चुनौतियां हैं. इस समय रिजर्व बैंक का ध्यान जीडीपी की दर बढ़ाने पर है. इसी को ध्यान में रखते हुए बैंक सुधारात्मक कदम उठा रही है. भले ही रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में कटौती नहीं की है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह ऐसा कर सकती है. रिजर्व बैंक का मानना है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में जीडीपी वृद्धि दर में उम्मीद से अधिक तेजी आयेगी. मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों को यथावत रखना रिजर्व बैंक द्वारा उठाया गया समीचीन कदम है.

मौजूदा समय में बैंकिंग प्रणाली में ऋण देने के लिए पर्याप्त नकदी है. ऋण वृद्धि दर में इजाफा हो रहा है. अर्थव्यवस्था में भी सुधार हो रहा है. रबी फसल के बंपर उत्पादन की आस है. ढुलाई व्यवस्था भी सामान्य हो रही है, जिससे खाद्य उत्पादों की किल्लत कम हो रही है. इससे आगामी महीनों में महंगाई पर लगाम लगने की संभावना बढ़ी है. (ये लेखक के निजी िवचार हैं)

posted by : sameer oraon

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