बच्चों को राहत

शिक्षा के व्यय और विद्यालयों की व्यवस्था तथा स्वास्थ्य के लिए बीमा की सुविधा से बच्चों को अपना भविष्य संवारने का अवसर प्राप्त होगा.

महामारी ने हजारों परिवारों का आसरा छीन लिया है और बड़ी संख्या में बच्चे बेसहारा हो गये हैं. ऐसे बच्चों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि जिं बच्चों के माता-पिता को आपदा ने छीन लिया है, उन्हें 18 साल की आयु तक एक निर्धारित वृत्ति मिलेगी और 18 से 23 साल की अवधि में उच्च शिक्षा व अन्य आवश्यकताओं के लिए पीएम-केयर्स के तहत 10 लाख रुपये कोष के माध्यम से सहायता मिलेगी. ऐसे बच्चों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा भी दिया जायेगा.

मृत व्यक्ति की आमदनी के अनुरूप आश्रित परिवार को पेंशन देने का प्रस्ताव है तथा बीमा सीमा को भी बढ़ाया जा रहा है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल और 25 मई के बीच 577 बच्चे अनाथ हुए हैं. वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने रेडियो संबोधन में भी देश को आश्वस्त किया है कि सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है. बच्चे ही भारत के सुखी और समृद्ध भविष्य की नींव हैं. जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खोया है, उनके सामने पहाड़-सा अनिश्चित जीवन है.

यदि उन्हें इस समय सहारा नहीं मिलेगा, तो न वे ठीक से शिक्षित हो सकेंगे और न ही अपने और अपने परिवार के लिए बाद में कुछ कर सकने की स्थिति में होंगे. इस वंचना से बचाने के लिए सरकार का आगे आना आवश्यक और सराहनीय पहल है. शिक्षा के व्यय और विद्यालयों की व्यवस्था तथा स्वास्थ्य के लिए बीमा की सुविधा से बच्चों को अपना भविष्य संवारने का अवसर प्राप्त होगा.

परिवार के लिए पेंशन और बीमा से संबंधित सुविधाओं से परिवार का दबाव भी कम होगा तथा सभी सदस्य नये सिरे से जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकेंगे. इस घोषणाओं पर अमल भी शुरू हो गया है. केंद्रीय श्रम आयुक्त राज्यों से कोरोना का शिकार हुए कामगारों की जानकारी जुटा रहे हैं. उल्लेखनीय है कि अनेक राज्य सरकारों ने भी प्रभावित गरीब और निम्न आय वर्ग के बच्चों व परिवारों को राहत देने की घोषणा की है. आगामी दिनों में ऐसे राज्यों की संख्या बढ़ने की आशा है.

बीते सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय ने भी राज्यों से बच्चों की देखभाल का निर्देश दिया है तथा प्रभावित बच्चों के बारे में सूचनाओं को राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग को उपलब्ध कराने को कहा है. न्यायालय ने महामारी और लॉकडाउन से पैदा हुई स्थिति में बच्चों को भोजन, वस्त्र और आश्रय आदि तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने का आदेश पहले ही जारी किया है. उम्मीद है कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रभावित परिवारों और बच्चों को सहायता देने की घोषणाओं को पूरा करने का हरसंभव प्रयास करेंगी. यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस प्रयास में एक भी जरूरतमंद बच्चा पीछे नहीं छूटे.

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Published by: संपादकीय

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