बदलता श्रम बाजार

इसमें कोई दो राय नहीं है कि कोरोना महामारी से पैदा हुई मुश्किलों को बहुत हद तक कम किया जा चुका है तथा अर्थव्यवस्था की बढ़त से अवसरों में भी बढ़ोतरी हो रही है.

हमारे देश में श्रम बाजार गहरे संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ताजा रिपोर्ट में इसे रेखांकित करते हुए कहा गया है कि हर स्तर पर स्व-उद्यमिता में बढ़ोतरी और उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ने से इस बदलाव को आधार मिल रहा है. श्रम बल और रोजगार की स्थिति पर सरकार नियमित रूप से एक सर्वेक्षण प्रकाशित करती है. रिपोर्ट का मानना है कि सर्वेक्षण की व्याख्या गलत ढंग से की जाती है और उसके आधार पर राजनीतिक रस्साकशी होती है. श्रम बल सर्वेक्षण के पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय कमी आयी है. हाल में प्रकाशित सर्वेक्षण की छठी वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2018 में बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत थी, जो 2023 में 3.2 रह गयी है.

इसमें यह भी पाया गया है कि इस अवधि में श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है. यह अभी 32 प्रतिशत है, जो 2019-20 में 28 प्रतिशत थी. रोजगार में लगे लोगों में स्व-रोजगार श्रेणी में 2018 में 52.2 प्रतिशत लोग थे. साल 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 57.3 प्रतिशत हो गया. स्टेट बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के श्रम बल में अस्सी के दशक से ही स्व-रोजगार में संलग्न लोगों का आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक रहा है. उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ने से बड़ी संख्या में युवा 23-24 साल की आयु तक शिक्षा ग्रहण करते हैं. अक्सर युवाओं में बेरोजगारी की गणना करते हुए शिक्षा संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों को भी गिन लिया जाता है.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि कोरोना महामारी से पैदा हुई मुश्किलों को बहुत हद तक कम किया जा चुका है तथा अर्थव्यवस्था की बढ़त से अवसरों में भी बढ़ोतरी हो रही है. स्व-रोजगार को बढ़ावा देने तथा वंचित वर्गों के लिए समावेशी वित्तीय नीतियां लागू करने के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं. रिपोर्ट ने पाया है कि हर श्रेणी में आमदनी बढ़ी है. प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्वनिधि, जन-धन खाते जैसी पहलों से निर्धन एवं निम्न आय वर्ग को बड़ी राहत मिली है. कोरोना काल में सबसे अधिक असर इन्हीं वर्गों तथा सूक्ष्म, छोटे एवं मझोले उद्यमों पर पड़ा था.

केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉर लोकल, मेड इन इंडिया जैसे अभियानों के अलावा उद्यमों के लिए अनेक कार्यक्रम लागू किये हैं और वित्तीय राहत भी मुहैया करायी है. केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के साथ-साथ राज्यों के स्तर पर भी कई कल्याण कार्यक्रम चल रहे हैं. इन प्रयासों से आबादी के बड़े हिस्से को लाभ मिला है. इन सब कारकों ने आमदनी और रोजगार के मौके बढ़ाने में योगदान दिया है.

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