हटेगी चीनी कंपनियों पर रोक

India China Relation: ट्रंप टैरिफ के बीच भारत और चीन ने आपसी रिश्ता सुधारने की पहल की है. इसी के तहत सीधी विमान सेवा शुरू होने और चीनी पेशेवरों के लिए व्यापार वीजा आसान बनाने के बाद अब चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटाने पर विचार किया जा रहा है.

By संपादकीय | January 13, 2026 6:10 AM

India China Relation: चीनी कंपनियों पर पांच साल से लगे प्रतिबंध हटाने पर सरकार विचार कर रही है, जो दोतरफा रिश्तों को सहज बनाने की दिशा में एक और कदम होगा. इससे चीनी कंपनियां भारत में रेलवे जैसी बड़ी परियोजनाओं में फिर से सरकारी ठेका हासिल कर सकेंगी. दरअसल, 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों की सीमा पर घातक झड़प के बाद चीनी कंपनियों पर रोक लगायी गयी थी. ऐसे में, बोली लगाने से पहले इन कंपनियों को एक सरकारी समिति में पंजीकरण कराने के साथ राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मंजूरी लेनी पड़ती है. प्रतिबंध से चीनी कंपनियों को भारी घाटा हुआ था और वे करीब 700 से 750 अरब डॉलर के सरकारी टेंडर से बाहर हो गयीं.

वर्ष 2020 में ही चीन की सरकारी कंपनी सीआरआरसी को 21.6 करोड़ डॉलर के ठेके में बोली लगाने के अयोग्य घोषित कर दिया गया था. मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी चीनी निर्भरता कम करने के प्रयास हुए और हुवै जैसी कंपनियों को 5जी ट्रायल्स और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से बाहर कर दिया गया. ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में चीनी कंपनियों को दी गयी नयी परियोजनाओं का मूल्य 27 प्रतिशत घटकर 1.67 अरब डॉलर रह गया था.

अब प्रतिबंध हटाने के बारे में इसलिए विचार किया जा रहा है, क्योंकि परियोजनाओं में देरी हो रही है और कई मंत्रालयों ने उपकरण जुटाने और परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में आ रही चुनौतियों की जानकारी दी है. जाहिर है कि चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का असर भारत पर भी पड़ा है. चीनी उपकरणों पर पाबंदी से बिजली के क्षेत्र में भारतीय परियोजनाएं खासतौर पर प्रभावित हुई हैं. दरअसल ट्रंप टैरिफ के कारण भारत-चीन के बीच रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलने लगी है और दोनों रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में पिछले एक साल से राजनयिक प्रयास कर रहे हैं.

जैसे, प्रधानमंत्री मोदी ने सात साल बाद चीन की यात्रा की और गहरे व्यापारिक संबंध बनाने पर सहमति जतायी. उनके चीन दौरे के बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू हुईं और अपने यहां चीनी पेशेवरों के लिए व्यापार वीजा की प्रक्रिया आसान की गयी. चूंकि सीमा पर तनाव कम होने से दोनों देशों के संबंध सुधर रहे हैं. ऐसे में, चीनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटाने से भारत-चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे. हालांकि सतर्कता भी बनी हुई है. जैसे, चीन से सीधे विदेशी निवेश पर प्रतिबंध जारी रहने वाला है. एक बिना लिखा हुआ आयताकार तस्वीर बना दें.