थैंक्सगिविंग त्योहार के पीछे का सच

जिन कबीलों ने गोरों को अमेरिका में बसाया, उन्हें या तो मार डाला गया या सिस्टम से हटा दिया गया. लेकिन उनको शुक्रिया कहनेवाला त्योहार अब नये रूप में धूमधाम से मनाया जाता है.

हर साल अमेरिका में नवंबर के चौथे गुरुवार को थैंक्सगिविंग (धन्यवाद देना) नाम से एक त्योहार मनाया जाता है. उस दिन लोग घर पर भव्य पारिवारिक भोज का आयोजन करते हैं, जिसमें अब परिवार के सभी सदस्यों को बुलाया जाता है या फिर निकट मित्रों को. भोज में टर्की नामक जंगली पक्षी पकाने का प्रचलन है और साथ ही, लोग भोज से पहले शुक्रिया भी अदा करते हैं, जो किसी को भी अदा किया जा सकता है.

हालिया वर्षों में यह त्योहार इतनी तेजी से प्रचलित हुआ है कि भारत के बड़े शहरों में भी इसी तर्ज पर भोज आयोजित होने लगे हैं. अमेरिकी त्योहारों में हैलोवीन भी भारत में मनाया जाने लगा है. पश्चिमी त्योहारों का अंधानुकरण करने की इस परपंरा को समाजशास्त्री दीपांकर गुप्ता ने ‘मिस्टेकन मॉडर्निटी’ (गफलत वाली आधुनिकता) कहा है. अमेरिका में भी अब थैंक्सगिविंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि इसकी पृष्ठभूमि को देखें, तो यह त्योहार किसी विडंबना से कम नहीं है.

अक्सर लोग समझते हैं कि अमेरिका में शुरू से ही गोरे लोग रहा करते थे, पर यह तथ्यात्मक रूप से गलत है. अमेरिका में गोरे लोग यूरोप से आये और उससे पहले उत्तरी अमेरिका में यहां के स्थानीय कबीले रहा करते थे, जिन्हें यूरोपीय गोरे लोगों ने ‘नैटिव इंडियन’ या ‘रेड इंडियन’ कहा. चूंकि कोलंबस निकला था इंडिया की खोज में और पहुंचा अमेरिका, तो उसने यहां के लोगों को ‘नेटिव इंडियन’ कहा और आज भी यही नाम रह गया है.

नेटिव इंडियन दिखने में ललछौंह ली हुई त्वचा वाले थे. ठंडे प्रदेशों में रहने के कारण उनका रंग साफ था और त्वचा तांबई थी. उन कबीलों के साथ लंबे समय तक यूरोपीय व्यापारियों ने व्यापार किया और उसके बाद, जैसा होता आया है, उन पर हमला कर धीरे-धीरे पूरे अमेरिका पर ब्रिटिश, फ्रेंच और स्पैनिश आक्रमणकारियों का कब्जा हो गया. जाहिर है कि यह प्रक्रिया एक दिन में घटित नहीं हुई और इसमें डेढ़ सौ साल लगे. शुरुआत में कई गोरे लोग ऐसे भी थे, जो अमेरिका में आकर खेती-बाड़ी कर रहे थे.

यह कहानी शुरू होती है वर्ष 1650 में. ब्रिटेन के प्लाईमाउथ से एक जहाज में लद कर धार्मिक लोगों का एक समूह अमेरिका पहुंचता है और यहां आकर एक गांव बसाता है मैसाचुसेट्स राज्य के आसपास. अमेरिका की कड़ी और अलग तरह की ठंड में खेती-बाड़ी के उनके सारे प्रयास विफल होते चले जाते हैं. उन्हें न तो पता होता है कि मक्के की खेती इन इलाकों में कैसे की जाये और न ही पेड़ों से रस निकालने के तरीके ही उन्हें मालूम होते हैं. ऐसे में जहाज से आये आधे से अधिक लोग भूख-प्यास से मारे जाते हैं.

ऐसी हालत में इन लोगों के पास स्थानीय अबेनाकी कबीले का एक आदमी आता है, जो अंग्रेजी बोल सकता है. यह आदमी उन्हें वामपानोआग नाम के एक दूसरे कबीले से मिलवाता है और यहां से कबीले के लोग इन गोरे लोगों को मछली मारना, मक्का उगाना, जहरीले पौधों से बचना सिखाते हैं. एक साल में ही गोरे लोग पहली बार मक्का उगाने में सफल होते हैं कबीले की मदद से.

जब वे पहली बार मक्का उगाते हैं, तो गोरे लोगों के मुखिया यह फैसला करते हैं कि इस खुशी में एक समारोह आयोजित किया जाये. उस समय इस समारोह का नाम भी थैंक्सगिविंग हो, इसके प्रमाण नहीं मिलते. कहा जाता है कि इस समारोह के दौरान गोरे लोगों के मुखिया उस कबीले के लोगों का शुक्रिया अदा करते हैं, जिनके कारण वे अमेरिका में रह पाये और खेती कर पाये. यहां से इस त्योहार की शुरुआत मानी जाती है. दो सदी बाद जब 1863 में अमेरिका गृह युद्ध से गुजर रहा होता है, तब तत्कालीन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन इस दिन को राष्ट्रीय छुट्टी घोषित करते हैं.

अब इस त्योहार की विडंबना समझिए. अमेरिका ब्रिटिश औपनिवेशिकता से आजाद होता है. फिर इस देश में गुलामी की प्रथा को खत्म किया जाता है, जिसके बाद पूरा देश गृहयुद्ध में लिप्त हो जाता है. इन सारी बड़ी घटनाओं के बीच कोई यह नहीं सोचता है कि जो इस देश के मूल नागरिक हैं यानी वे कबीले, जो गोरे और काले लोगों के आने से कई सौ साल पहले से यहां रह रहे थे, उनका क्या हुआ. ये कबीले पूरे अमेरिका में अब गिनी-चुनी संख्या में रह गये हैं. उन्हें राष्ट्रीय अभ्यारण्य बना कर उन्हीं जंगलों में महदूद कर दिया गया है, जहां वे बरसों से रह रहे हैं.

अमेरिका के बारे में अन्य देशों के लोग भी यह नहीं जानते हैं कि कभी अमेरिका में स्थानीय कबीलों का राज भी था. कई लोग कहने लगे हैं कि गोरों को अपनी कहानी कहने के बजाय नेटिव अमेरिकियों की कहानियों को सुनना चाहिए. जरा सोचें, जिन कबीलों की पहुंच कभी तमाम प्राकृतिक संसाधनों तक थीं, आज के समय में कुछ कबीलों को पीने का साफ पानी मुहैया नहीं है.

अध्ययनों में बताया गया है कि लगभग पचासी फीसदी नेटिव अमेरिकी महिलाओं को विभिन्न प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ता है. इतना ही नहीं, इन कबीलों की स्वायत्तता को भी रेखांकित नहीं किया गया है और जमीन से संबंधित उनके घोषित अधिकारों का भी अक्सर उल्लंघन होता रहता है. उनके सम्मान और उनके अधिकारों के पक्षधर कहते हैं कि नेटिव कबीलों से शेष अमेरिका को सीखना चाहिए क्योंकि वे यहां हमेशा से हैं.

सोचिए, जिन कबीलों ने गोरे लोगों को अमेरिका में बसाया, उनकी मदद की, उनको जीना सिखाया, उन सारे कबीलों को या तो मार डाला गया या उनको पूरे अमेरिकी सिस्टम से हटा दिया गया. लेकिन उनको शुक्रिया कहनेवाला त्योहार अब नया रूप ले चुका है और पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है.

पिछले कुछ सालों में नेटिव अमेरिकियों के छोटे समूहों ने इसका विरोध करना शुरू किया है और कुछ जागरूक लोग इस त्योहार को मनाये जाने पर सवाल भी उठाने लगे हैं और पूछने लगे हैं कि आखिर थैंक्सगिविंग में जिसका शुक्रिया अदा किया जाता है, वह पूरे अमेरिकी सिस्टम में हैं कहां. उनका कहना है कि स्थानीय कबीले देश के अतीत का अहम हिस्सा हैं और उन्हें पीछे नहीं छोड़ा जा सकता है. उनके प्रति सम्मान और उन्हें साथ में समानता के साथ आगे चलने के लिए सबसे जरूरी है कि पहले उनकी पहचान को और उनके अस्तित्व को मान दिया जाये. सदियों से जो व्यवहार गोरे लोग उनके साथ करते रहे हैं, उसकी भरपाई बहुत जल्दी संभव नहीं है, पर नेटिव लोगों की आवाज को सुनना शुरू कर देना चाहिए.

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