बेहतरी की गुंजाइश

अमेरिकी विदेश सचिव माइक पॉम्पियो ऐसे समय में भारत आये हैं, जब दोनों देशों के बीच अनेक मोर्चों पर खींचतान चल रही है. अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत को ईरान से तेल आयात को रोकना पड़ा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर आयात शुल्कों को लेकर भारत की आलोचना करते रहे हैं और कुछ समय […]

अमेरिकी विदेश सचिव माइक पॉम्पियो ऐसे समय में भारत आये हैं, जब दोनों देशों के बीच अनेक मोर्चों पर खींचतान चल रही है. अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत को ईरान से तेल आयात को रोकना पड़ा है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर आयात शुल्कों को लेकर भारत की आलोचना करते रहे हैं और कुछ समय पहले ही अमेरिका ने बिना शुल्क अनेक वस्तुओं के आयात को मिली विशेष छूट को खत्म कर दिया. इसके बदले भारत ने भी लगभग सालभर की हिचकिचाहट के बाद 28 अमेरिकी वस्तुओं के आयात पर भी शुल्क बढ़ा दिया है.
अमेरिकी कंपनियों के लिए बाधक नियमों तथा स्थानीय स्तर पर डिजिटल डेटा के संग्रहण की भारत की मांग भी तनातनी का एक कारण हैं. सूचना तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक बढ़त के साथ कदमताल करने की कोशिश में भारत ने 5जी को अपनाने का फैसला लिया है.
अमेरिका अपने अनेक करीबी देशों पर दबाव डालकर इस तकनीक में अग्रणी चीनी कंपनी हुवै को प्रतिबंधित करा चुका है. उसे भारत से भी ऐसी ही अपेक्षा है. ट्रंप प्रशासन द्वारा वीजा नियमों में बदलाव से कुशल भारतीय पेशेवरों के सामने मुश्किलें पैदा हो रही हैं. इसके अलावा अफगानिस्तान में शांति और विकास तथा भारत के विरुद्ध सीमा-पार से संचालित आतंकवाद पर भी सहयोग तेज करना इस यात्रा का एक मुख्य एजेंडा है.
रूस से सैनिक साजो-सामान की खरीद पर अमेरिकी आपत्ति पर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है. पॉम्पियो के साथ मीडिया से मुखातिब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि अगर दो देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंध हैं, तो कुछ मसलों पर असहमतियां या विवाद भी स्वाभाविक हैं.
दोनों नेताओं ने यह उम्मीद जतायी है कि आपसी बातचीत से परस्पर राष्ट्रीय हितों के अनुकूल विवादित मुद्दों को सुलझा लिया जायेगा. इस आशावादी रवैये से असहमत होने का फौरी आधार नहीं है, क्योंकि बीते डेढ़ दशकों में दोनों देशों के संबंध बहुत गहरे हुए हैं. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरह राष्ट्रपति ट्रंप से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं.
कूटनीति में यह तत्व महत्वपूर्ण कारक है. विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिका में राजदूत भी रह चुके हैं तथा परस्पर निकटता बढ़ाने में उनकी उल्लेखनीय भूमिका रही है. लेकिन कूटनीति की राह रपटीली भी होती है. राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों के तेवर और भारत आने से पहले पॉम्पियो द्वारा हमारे देश में मौलिक अधिकारों की स्थिति पर नकारात्मक रिपोर्ट जारी करने जैसे संकेत चिंताजनक भी हैं.
अमेरिकी कांग्रेस में विदेश मामलों की समिति के प्रमुख इलियट एंजिल ने सोमवार को पॉम्पियो को पत्र लिखकर कहा है कि भारत के प्रति ट्रंप प्रशासन का नीतिगत रवैया अस्थिर, दबावपूर्ण और अनिश्चित है. यह पत्र अमेरिकी राजनीतिक गलियारे में बढ़ रही चिंता का संकेत है. बहरहाल, उम्मीद रखनी चाहिए कि पॉम्पियो की यह यात्रा तनाव कम करने में सहायक होगी.

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