महिला आरक्षण : विपक्ष से पीएम मोदी की इमोशनल अपील-वोट करते वक्त घर की महिलाओं को याद कर लें

PM Modi : संसद में महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन पर बहस तेज है और सरकार यह कोशिश कर रही है कि सांसदों को एकजुट करके यह बिल पास करा लिया जाए. इसी कोशिश के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा के सभी सांसदों को बिल पर एकजुट करने के लिए एक्स पर एक इमोशनल पोस्ट किया है.

PM Modi : महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए शुक्रवार को मतदान होना है, इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावनात्मक अपील लोकसभा के सदस्यों से की है. प्रधानमंत्री ने कुछ देर पहले सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट लिखा है, जिसमें उन्होंने लोकसभा के सम्मानित सदस्यों से अपने अंतरात्मा की आवाज पर वोट करने की अपील की है.

परिवार की महिलाओं को याद कर करें वोट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा के सांसदों से यह अपील की है कि जब वे मतदान करें तो अपने परिवार की महिलाओं को ध्यान में रखते हुए वोट करें. उन्होंने एक्स पर पोस्ट लिखकर सांसदों से इस विधेयक के समर्थन में एकजुट रहने का आह्वान किया है. उन्होंने सांसदों का आह्वान किया है कि वे इस ऐतिहासिक अवसर पर विचार करें.

महिलाओं को उनका हक देने का उचित समय

प्रधानमंत्री ने अपने विस्तृत पोस्ट में यह लिखा है कि शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का यह उचित अवसर है. अगर हम इस विधेयक को पास कर महिलाओं को आरक्षण देते हैं, तो यह महिलाओं के साथ न्याय होगा. महिलाओं को आरक्षण देने वाला यह विधेयक देश के लोकतंत्र को और मजबूत करेगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आधी आबादी महिलाओं की है और उन्हें उनका हक मिलना बेहद जरूरी है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और सांसदों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस विधेयक का समर्थन करें और एक ऐतिहासिक निर्णय का हिस्सा बनें.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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