UGC Policy Row: सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपना इस्तीफा राज्यपाल और बरेली के डीएम अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से भेज दिया है. पहले जानते हैं कि आखिरी उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया? फिर विपक्ष की प्रतिक्रिया और अग्निहोत्री के बारे में भी जानेंगे.
अग्निहोत्री ने अपने पद से क्यों दिया इस्तीफा ?
पद से इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बातचीत में अग्निहोत्री ने कहा, बीते दो सप्ताह में दो बड़े निंदनीय मामले सामने आए हैं, जिन्होंने उन्हें झकझोर कर रख दिया है. उन्होंने कहा कि पहला मामला प्रयागराज माघ मेले से जुड़ा है, जहां मौनी अमावस्या के स्नान के लिए जाते समय ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों को चोटी खींचकर घसीटा गया और पिटाई की गई. यह कृत्य बेहद निंदनीय है और वास्तविक अर्थों में प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई. अग्निहोत्री ने कहा- वह इस तंत्र का हिस्सा नहीं बन सकते, क्योंकि न जनतंत्र बचा है और न गणतंत्र, अब केवल गणतंत्र शेष रह गया है.
यूजीसी के नए नियमों में बदलाव काला कानून : अग्निहोत्री
अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए नियमों को काला कानून बताते हुए आरोप लगाया कि ये नियम कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर देंगे और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए. उन्होंने 13 जनवरी को प्रकाशित यूजीसी विनियम 2026 पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इससे ब्राह्मण समुदाय के लोगों पर अत्याचार होंगे. ब्राह्मण जनप्रतिनिधि किसी कॉरपोरेट कंपनी के कर्मचारी बनकर रह गए हैं.
कौन हैं अग्निहोत्री ?
अग्निहोत्री प्रांतीय प्रशासनिक सेवा ( PCS) के 2019 बैच के अधिकारी हैं. कानपुर नगर के निवासी अग्निहोत्री पहले उन्नाव, बलरामपुर और लखनऊ समेत कई जिलों में एसडीएम के रूप में कार्य कर चुके हैं. अग्निहोत्री अपने साफ विचारों और सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से बीटेक और एलएलबी की पढ़ाई की है. अग्निहोत्री ने अमेरिका में भी काम किया है.
अग्निहोत्री के इस्तीफे पर सियासी पारा चढ़ा, विपक्ष ने बीजेपी पर बोला हमला
अग्निहोत्री के पद से इस्तीफा देने के मामले को लेकर विपक्षी दलों कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश को डर से नहीं संविधान से चलाया जाना चाहिए. पूर्व मंत्री अजय राय ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा देना बेहद गंभीर संकेत है. शंकराचार्य और उनके शिष्यों पर लाठीचार्ज और प्रशासनिक दबाव, यह सब दर्शाता है कि भाजपा सरकार में संविधान, आस्था और अभिव्यक्ति तीनों असुरक्षित हैं. सच्चाई सामने आनी चाहिए. प्रदेश को डर से नहीं, संविधान से चलाया जाए. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और बरेली के पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा, एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी के इस्तीफा देने से जुड़ी परिस्थितियां इस ओर ध्यान दिलाती हैं कि ये मुद्दा किसी जाति या धर्म का नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा व संविधान का है.
UGC के नये नियम में क्या है?
यूजीसी ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम लागू किए हैं. इन नियमों के तहत संस्थानों को विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी दल गठित करने होंगे ताकि विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके.