बद्रीनाथ-केदारनाथ में गैर-हिंदू की एंट्री बैन होगी, मंदिर समिति ने लिया निर्णय, गंगोत्री धाम और मुखबा में भी रोक की तैयारी

Badrinath-Kedarnath Temple Non-Hindus Ban: उत्तराखंड के गंगोत्री धाम में अब गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. यह फैसला रविवार को श्री गंगोत्री मंदिर समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया. समिति ने कहा कि यह प्रतिबंध गंगोत्री धाम के साथ-साथ मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थल मुखबा पर भी लागू होगा.

Badrinath-Kedarnath Temple Non-Hindus Ban: उत्तराखंड में हिमालय की पहाड़ियों के बीच स्थित बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में अब सिर्फ हिंदू श्रद्धालुओं को ही प्रवेश देने की तैयारी है. इन दोनों प्रसिद्ध धामों की देखरेख करने वाली मंदिर समिति ने साफ कहा है कि चारधाम यात्रा का हिस्सा रहे इन मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाई जाएगी. यह फैसला रविवार को हुई श्री गंगोत्री मंदिर समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया. 

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह प्रतिबंध सिर्फ गंगोत्री धाम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मां गंगा की शीतकालीन गद्दी स्थल मुखबा में भी लागू होगा. श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि समिति के निर्णय के अनुसार धाम में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. उन्होंने बताया कि यह नियम मुखबा में भी लागू होगा.

इसके अलावा, उत्तराखंड सरकार हरिद्वार के 105 घाटों में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश को सीमित करने पर विचार कर रही है. यह लगभग 120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हैं. यह कदम कुछ संतों और गंगा सभा की मांग के बाद उठाया जा रहा है. गंगा सभा हर की पौड़ी घाट की देखरेख करती है. कुछ दिन पहले हर की पैड़ी और हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदुओं के प्रवेश को रोकने की मांग की गई थी. इस आशय के कुछ बोर्ड भी यहां लगा दिए गए थे. 

राज्य सरकार हरिद्वार और ऋषिकेश को “सनातन पवित्र शहर” घोषित करने की योजना भी बना रही है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “प्रशासन तीर्थ स्थलों का प्रबंधन करने वाली समितियों और संस्थाओं की सिफारिशों के अनुसार कार्य करेगा.”

उत्तराखंड की पहचान, कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा कदम

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष और भाजपा नेता हेमंत द्विवेदी ने कहा कि दोनों धामों और मंदिर समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में, गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा. उन्होंने इसे उत्तराखंड की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया. बीकेटीसी अध्यक्ष ने भरोसा जताया कि राज्य सरकार और मंदिर समितियों के बीच तालमेल से उत्तराखंड के मंदिरों की पवित्रता और परंपराओं की बेहतर रक्षा हो सकेगी.

भाजपा पहले से ही उठाती रही है यह मुद्दा

इससे पहले मार्च 2025 में केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक आशा नौटियाल ने भी मांग की थी कि “गैर-हिंदू लोगों को” मंदिर परिसर में प्रवेश से रोका जाए. नौटियाल ने एएनआई से कहा था, “हाल ही में केदारनाथ यात्रा प्रबंधन को लेकर एक बैठक हुई थी. कुछ लोगों ने शिकायत की कि कुछ घटनाएं होती हैं जो ध्यान में नहीं आतीं. अगर कोई ऐसी गतिविधि करता है जिससे केदारनाथ धाम की छवि खराब होती है, तो ऐसे लोगों के प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए.”

उन्होंने आरोप लगाया था कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोग “निश्चित रूप से गैर-हिंदू” होते हैं, जो मंदिर की छवि खराब करने के इरादे से आते हैं. उन्होंने कहा, “हमें इस मुद्दे को गंभीरता से देखना चाहिए. अगर यह सवाल उठ रहा है तो जरूर कुछ बात होगी. हम मांग करेंगे कि ऐसे लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए.”

कब खुलेंगे मंदिर कपाट?

चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ मंदिर छह महीने के शीतकालीन अवकाश के बाद 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोला जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, बसंत पंचमी के अवसर पर नरेंद्र नगर स्थित टिहरी राजमहल में पारंपरिक पूजा-विधि के बाद तिथि और मुहूर्त तय किए गए. उत्तरकाशी में स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री धाम 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन खुलेंगे, जबकि रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि पर घोषित की जाएगी.

एएनआई के इनपुट के साथ.

ये भी पढ़ें:- 77th Republic Day 2026: सेना, युवा, ब्रह्मोस, अपाचे, धनुष, राफेल, सुखोई की परेड, कर्तव्य पथ पर दिखी भारत की ताकत

ये भी पढ़ें:- Republic Day 2026: इंडियन आर्मी के सबसे खास दोस्तों वाली टुकड़ी, गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार हिस्सा ले रही 

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >