उत्तरकाशी सुरंग हादसा: क्या है ‘रैट होल’ ड्रिलिंग? वीडियो में देखें कैसे चल रहा है बचाव का काम

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उत्तरकाशी सुरंग हादसा: क्या है ‘रैट होल’ ड्रिलिंग? वीडियो में देखें कैसे चल रहा है बचाव का काम
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उत्तरकाशी सुरंग हादसा: क्या है ‘रैट होल’ ड्रिलिंग? वीडियो में देखें कैसे चल रहा है बचाव का काम

उत्तरकाशी सुरंग हादसे के बाद फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए अब हाथ से ड्रिलिंग की जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पी के मिश्रा सोमवार को सिलक्यारा पहुंचे. जानें ताजा हालात और देखें वीडियो

निर्माणाधीन सिलक्यारा-बरकोट सुरंग में फंसे 41 मजदूरों के बाहर आने का इंतजार पूरे देश को है. इस बीच राहत बचाव कार्य में तेजी आई है. सुरंग के अंदर मैनुअल ड्रिलिंग चल रही है और पाइप को धकेलने के लिए बरमा मशीन का उपयोग किया जा रहा है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने राहत बचाव का ताजा वीडियो मंगलवार सुबह जारी किया और जानकारी दी कि लगभग 2 मीटर की मैन्युअल ड्रिलिंग पूरी हो चुकी है.

इससे पहले सोमवार को खबर आई थी कि वैकल्पिक रास्ता तैयार करने के लिए रविवार को सुरंग के ऊपर से शुरू की गयी ड्रिलिंग 36 मीटर तक पहुंच गयी. इसके तहत 1.2 मीटर व्यास के पाइपों को सुरंग के शीर्ष से नीचे की ओर डाला जायेगा. बताया जा रहा है कि मजदूरों तक पहुंचने के लिए कुल 86 मीटर तक ड्रिलिंग की जानी है, जिसमें से 50 मीटर तक ड्रिलिंग करना अभी बाकी है.

इस बीच सबके मन में सवाल आ रहा है कि आखिर कौन हैं रैट माइनर्स? तो आपको बता दें कि पतले से पैसेज में चूहों की तरह अंदर जाकर ड्रिल करने वाले मजदूरों को रैट माइनर्स कहते हैं. इस तरह से ड्रिल करने के किए स्पेशल ट्रेनिंग, स्किल और काफी अभ्यास की जरूरत होती है.

रैट माइनर्स की बात करें तो ये दो-दो के समूह में 800 मीटर व्यास वाले पाइपों में प्रवेश करेंगे. इसके लिए फ्रेम पहले से ही तैयार थे. माइनर्स आधा मीटर से लेकर एक मीटर की दूरी लेते हुए खुदाई करते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ने का काम करेंगे.

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‘रैट होल’ ड्रिलिंग तकनीक के विशेषज्ञ ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार इस दौरान एक व्यक्ति ड्रिलिंग करेगा, दूसरा मलबे को इकटठा करेगा और तीसरा मलबे को बाहर निकालने के लिए उसे ट्रॉली पर रखेगा. आपको बता दें कि इस तकनीक के बाद मजदूरों के जल्दी बाहर आने की उम्मीद बढ़ गई है.

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव डॉ. पी के मिश्र सोमवार को सिलक्यारा पहुंचे. यहां उन्होंने 12 नवंबर से फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए चलाए जा रहे बचाव कार्यों का जायजा लिया. उन्होंने सुरंग के अंदर चल रहे बचाव कार्य की बारीकियों को समझा, साथ ही अधिकारियों के साथ बचाव कार्य में जुटे इंजीनियर और श्रमिकों से बात करके उनका हौसला बढ़ाने का काम किया.

जहां एक ओर पूरा देश मजदूरों के बाहर आने के लिए दुआ मांग रहा है. वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मजदूरों की सुरक्षित निकासी के लिए ‘कोटि दीपोत्सवम’ में प्रार्थना की.

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By Amitabh kumar

अमिताभ कुमार प्रभात खबर डिजिटल में Sr. Content writer हैं. पिछले 15 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं.

अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

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