Uddhav vs Shinde: शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने लोकसभा स्पीकर से मिलकर उन्हें एक नया पत्र सौंपा. इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बागी सांसदों के मामले में कोई भी एकतरफा फैसला न लिया जाए.
बिना हमारा पक्ष सुने न लें कोई फैसला : अरविंद सावंत
आप सभी जानते हैं कि उद्धव ठाकरे जी के नेतृत्व वाली पार्टी के हमारे छह सांसदों ने पाला बदलकर दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया है. पिछले हफ्ते भी अनिल देसाई और मैंने स्पीकर साहब से मुलाकात कर इस संबंध में एक अनुरोध पत्र सौंपा था. हमने उनसे साफ कहा था कि यदि कोई सांसद व्यक्तिगत रूप से या समूह में आकर पार्टी छोड़ने का दावा करता है, तो संविधान की रक्षा करना स्पीकर का कर्तव्य है और हमें उनसे यही उम्मीद है. अरविंद सावंत ने आगे बताया कि हालिया घटनाक्रम को देखते हुए उन्होंने स्पीकर को एक और पत्र भेजा है. उन्होंने कहा, हमने लोकसभा अध्यक्ष से विशेष अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले में कोई भी कदम उठाने या फैसला लेने से पहले हमारा पक्ष अनिवार्य रूप से सुना जाए. हमारी बात सुने बिना कोई भी निर्णय न लिया जाए. इसी सिलसिले में आज उन्होंने हमें मिलने का समय दिया था. जब हमने उनसे पूछा कि क्या बागी गुट की तरफ से उन्हें कोई पत्र मिला है, तो स्पीकर ने स्पष्ट किया कि उन्हें अभी तक ऐसा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है.
शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 लोकसभा सांसद शिंदे गुट में हो गए शामिल
शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सदस्यों में से 6 महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं. सावंत, देसाई और राजाभाऊ वाजे अब भी शिवसेना (UBT) के साथ बने हुए हैं. पार्टी छोड़ चुके सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजे निंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं.
फरवरी 2023 में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को असली शिवसेना माना
फरवरी 2023 में निर्वाचन आयोग ने शिंदे के नेतृत्व वाले धड़े को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी. शिंदे ही 2022 में अविभाजित शिवसेना में हुए विभाजन के मुख्य सूत्रधार थे, जिसके कारण महाराष्ट्र में महा विकास आघाडी सरकार गिर गई थी.
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