MIRV तकनीक से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का किया गया सफल परीक्षण, सैन्य क्षमता में हुई वृद्धि

Advanced Agni missile : ओडिशा के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया है. इस मिसाइल को हिंद महासागर क्षेत्र में कई जगहों पर टारगेट किया गया था.

Advanced Agni missile : भारत ने 8 मई को ओडिशा के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल फ्लाइट परीक्षण किया गया. मिसाइल का फ्लाइट टेस्ट कई पेलोड के साथ किया गया, जिन्हें हिंद महासागर क्षेत्र में एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर टारगेट किया गया था. यह जानकारी डीआरडीओ की ओर से दी गई है.

रक्षामंत्री ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने MIRV कैपेबिलिटी वाली अग्नि के सफल फ्लाइट परीक्षण के लिए डीआरडीओ, इंडियन आर्मी और परीक्षण से जुड़े तमाम लोगों को बधाई दी है. राजनाथ सिंह ने कहा कि इस परीक्षण से देश की रक्षा क्षमता में जबरदस्त वृद्धि होगी.

क्या है MIRV तकनीक?

MIRV एक ऐसी मिसाइल तकनीक है जिसमें एक ही बैलिस्टिक मिसाइल कई अलग-अलग वारहेड (विस्फोटक सामग्री) लेकर जाती है और उड़ान के बाद उन्हें अलग-अलग टारगेट पर भेज सकती है. जब मिसाइल लॉन्च होती है तो वह ऊंचाई पर पहुंचकर अपने अंदर मौजूद कई वारहेड को अलग करती है और वे वारहेड अलग-अलग दिशा में जाकर लक्ष्य को निशाना बनाते हैं. यह तकनीक विश्व में अमेरिका, रूस, चीन और अब भारत के पास भी आ गई है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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