मेदांता के बाहर भारी पुलिस बल देख भड़कीं सोनम वांगचुक की पत्नी, बताया शर्मनाक

सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ गीतांजलि आंग्मो मेदांता अस्पताल के बाहर भारी पुलिस बल देखकर नाराज हो गईं. उन्होंने आरोप लगाया है कि सोनम से मिलने आए विपक्षी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल और लद्दाख के नेताओं को पुलिस अंदर जाने से रोक रही है.

डॉ गीतांजलि ने अस्पताल के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के तहत सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल शिफ्ट किया गया था. अदालत ने साफ किया था कि सोनम पुलिस हिरासत में नहीं हैं और उन्हें बेहतर इलाज और स्वतंत्रता देने के लिए यहां लाया गया है.

"यह बेहद शर्मनाक है कि 25 दिनों से भूखे-प्यासे एक भारतीय नागरिक को मानसिक शांति नहीं दी जा रही है. सोनम के ICU के बाहर इतनी पुलिस तैनात है कि खुद अस्पताल का स्टाफ भी हैरान है." डॉ गीतांजलि आंग्मो

सांसदों को मिलने से रोकने पर सरकार से सवाल

डॉ गीतांजलि ने कहा- विपक्षी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल हस्ताक्षरित पत्र लेकर सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील करने आया था. इसके अलावा लद्दाख से आए 10 नेता भी घंटों से बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन पुलिस ने किसी को मिलने नहीं दिया.

डॉ गीतांजलि ने सवाल उठाते हुए कहा, "जब सांसद सोनम का अनशन तुड़वाने आए हैं और सरकार उन्हें मिलने नहीं दे रही, तो क्या सरकार यही चाहती है कि सोनम अपना अनशन जारी रखें?"


अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखने का फैसला

पत्नी गीतांजलि ने बताया, सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) और पत्र के जरिए संदेश दिया है कि वे अपना अनशन तभी तोड़ेंगे जब भारत सरकार की ओर से ठोस लिखित आश्वासन मिलेगा.

अनशन खत्म करने की सोनम वांगचुक ने रखी शर्तें

  • प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी या शारीरिक कार्रवाई न हो और कोई FIR दर्ज न की जाए. आंदोलन में शामिल बच्चों के भविष्य और सुरक्षा की पूरी गारंटी दी जाए.
  • मांगें पूरी न होने की स्थिति में सोनम ने अपनी भूख हड़ताल को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है.

सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य कैसा है?

पत्नी गीतांजलि ने बताया, 25 दिनों के अनशन के बाद सोनम वांगचुक का शरीर काफी कमजोर हो चुका है और मांसपेशियों में गिरावट आ रही है. हालांकि, डॉक्टरों के मुताबिक उनके वाइटल्स (Vitals) फिलहाल स्थिर हैं और स्थिति नियंत्रण में है.


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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

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शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

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बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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