शरद पवार का अध्यक्ष पद से इस्तीफा मजबूरी या मास्टर स्ट्रोक? NCP में बढ़ता जा रहा अजित पवार का दबदबा

NCP chief Sharad Pawar to step down अपने जीवन से जुड़ी एक किताब के विमोचन के मौके पर शरद पवार ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे का जैसे ही ऐलान किया, वहां मौजूद पार्टी कार्यकर्ता हैरान रह गये. लेकिन पवार अपने इसी तेवर के लिए जाने जाते हैं. उनके बयान महाराष्ट्र की राजनीति में काफी मायने रखते हैं.

शरद पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ( Nationalist Congress Party) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है. जिसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से भूचाल आ गया. शरद पवार के इस फैसले से एनसीपी में हलचल मच गयी. उन्हें फैसला बदले के लिए मनाया जा रहा है. उन्हें मनाने की कोशिश में कई एनसीपी कार्यकर्ता रो पड़े. शरद पवार ने इसका संकेत दो दिनों पहले ही दे दिया था.

क्या मजबूरी में शरद पवार ने इस्तीफे का लिया फैसला?

अपने जीवन से जुड़ी एक किताब के विमोचन के मौके पर शरद पवार ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे का जैसे ही ऐलान किया, वहां मौजूद पार्टी कार्यकर्ता हैरान रह गये. लेकिन पवार अपने इसी तेवर के लिए जाने जाते हैं. उनके बयान महाराष्ट्र की राजनीति में काफी मायने रखते हैं. हालांकि मीडिया जगह में ये भी खबर चल रही है कि कुछ दिनों से एनसीपी में शरद पवार का पावर कम हुआ है और अजित पवार का दबदबा बढ़ा है. इस बात से शरद पवार भी नाखुश हैं. उन्होंने दो दिनों पहले ही अपने इस्तीफे के बारे में संकेत दे दिये थे. उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि भाखरी को पलट देना चाहिए. इसे पलटने में देरी नहीं करना चाहिए. इसका समय आ गया है. पवार की इस टिप्पणी को एनसीपी में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा था. अजित पवार की बात करें, तो वह एनसीपी के लिए पहले भी मुश्किलें खड़ी कर चुके हैं. 2019 में उन्होंने पार्टी से बगावत कर ली थी और देवेंद्र फडणवीस के साथ सरकार बनाने की कोशिश की थी. हाल के दिनों में भी अजित पवार के पार्टी से बगावत की खबरें आयी थीं.

शरद पवार ने लगाया मास्टर स्ट्रोक

ऐसा भी माना जा रहा है कि शरद पवार ने अपने इस्तीफे का ऐलान कर मास्टर स्ट्रोक खेला है. कुछ दिनों पहले खबर आयी थी कि अजित पवार अपने कुछ समर्थक विधायकों के साथ एनसीपी से बगावत कर सकते हैं और बीजेपी के साथ हाथ मिला सकते हैं. इस खबर पर शरद पवार का भी बयान आया था और कहा था कि यह फैसला व्यक्तिगत हो सकता है, लेकिन एनसीपी बीजेपी के साथ नहीं जाएगी. अजित पवार के बगावत की खबर के बाद ये भी कहा जाने लगा था कि एनसीपी कमजोर हो चुकी है. लेकिन शरद पवार ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे की घोषणा कर एक बार फिर से पार्टी में जान फूंक दी है. समर्थक लगातार उनसे फैसला बदले की मांग कर रहे हैं. कई समर्थक तो उनके सामने रो रहे हैं. प्रफुल्ल पटेल ने कहा, इस्तीफे पर शरद पवार को विचार करना चाहिए. पवार जो चाहेंगे वही होगा. पार्टी में जो बदलाव करना चाहते हैं, शरद पवार कर सकते हैं. वहीं जयंत पाटील ने कहा, पवार को सीधे इस्तीफा नहीं देना चाहिए. पवार के बीना जनता के बीच हम कैसे जायेंगे. अजित पवार ने भी कहा, शरद पवार के फैसले पर विचार किया जाएगा. इस्तीफे का फैसला सही नहीं है. कहा जा रहा है शरद पवार के इस फैसले से एक बार फिर से पार्टी में एकजुटता आयी है.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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