SC/ST committee: भुवनेश्वर में होगा एससी-एसटी कल्याण समितियों के सभापतियों का राष्ट्रीय सम्मेलन

सम्मेलन में संवैधानिक सुरक्षा के उपाय को सुदृढ़ बनाने, सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और वर्ष 2047 तक समावेशी विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में संसदीय व विधायी समितियों की भूमिका पर विशेष चर्चा होगी.

SC/ST committee: संसद और राज्य विधान मंडलों की ‘अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समितियों’ के सभापतियों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन भुवनेश्वर में आयोजित होगा. लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. 29 और 30 अगस्त को होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन का विषय है, ‘अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण, विकास और सशक्तिकरण में संसदीय और विधायी समितियों की भूमिका’.  इसमें संसद और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के 120 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे. सम्मेलन में संवैधानिक सुरक्षा के उपाय को सुदृढ़ बनाने, सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और वर्ष 2047 तक समावेशी विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में संसदीय व विधायी समितियों की भूमिका पर विशेष चर्चा होगी. 

उद्घाटन सत्र में ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश और एससी-एसटी कल्याण संबंधी संसदीय समिति के सभापति डॉ. फग्गन सिंह कुलस्ते विशिष्ट जनसभा को संबोधित करेंगे. ओडिशा विधान सभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी स्वागत भाषण देंगी, जबकि उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई धन्यवाद ज्ञापित करेंगे. समापन सत्र 30 अगस्त को ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति के विदाई भाषण के साथ होगा.  

अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समितियां 


संसद और राज्य विधान मंडलों में कई स्थायी और विभागीय समितियां होती हैं. इन्हीं में से एक प्रमुख समिति है, ‘अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण संबंधी समिति’. इस समिति का गठन अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के कल्याण से जुड़ी नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों की निगरानी के लिए किया जाता है. 1970 के दशक में एससी-एसटी कल्याण योजनाओं के सही क्रियान्वयन और निगरानी के उद्देश्य से इन समितियों का गठन शुरू हुआ. गौरतलब है कि इस प्रकार का पहला सम्मेलन वर्ष 1976 में नई दिल्ली में आयोजित हुआ था.

इसके बाद 1979, 1983, 1987 और 2001 में सम्मेलन हुए. इस बार पहली बार यह आयोजन दिल्ली से बाहर, भुवनेश्वर में किया जा रहा है. इस सम्मेलन से अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समितियों के बीच बेहतर संवाद स्थापित होगा. साथ ही, प्रतिनिधियों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान से से चुनौतियों के समाधान तलाशने में मदद मिलेगी. 

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By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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