रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के विरोध-प्रदर्शन के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा, "राहुल गांधी अपनी बहन के साथ बिना किसी पूर्व अनुमति के प्रधानमंत्री आवास के गेट पर धरने पर बैठ गए. उनके पिता, दादी और परदादा देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं, ऐसे में उन्हें भली-भांति पता होना चाहिए कि प्रधानमंत्री आवास की क्या गरिमा और महत्व होता है."
क्या राहुल गांधी को शासन-प्रशासन की बुनियादी समझ नहीं है? : रविशंकर प्रसाद
रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर हमला करते हुए आगे कहा, "NEET पर एक बड़ा कानून आया और सदन में सिर्फ उसी पर बहस हुई. राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. वे बार-बार कहते रहे कि पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री को जवाब देना चाहिए. क्या राहुल गांधी को शासन-प्रशासन की बुनियादी समझ नहीं है? क्या कभी गृह मंत्री के आदेश पर गोली चलाई जाती है? वहां पुलिस अधिकारी होते हैं; उनसे सलाह-मशविरा करने के बाद ही कार्रवाई की जाती है."
लोकतंत्र में भरोसा रखने वाले लोग कांग्रेस और विपक्ष को कभी माफ नहीं करेंगे : बीजेपी
बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, "कांग्रेस ने संसद के इतिहास पर एक काला धब्बा लगाया है. पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया. कांग्रेस और विपक्ष ने जिस तरह की हरकतें की हैं, उन्हें लोकतंत्र में भरोसा रखने वाले लोग कभी माफ नहीं करेंगे. कांग्रेस ने जिस तरह एक के बाद एक शर्तें रखीं और विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी ने पूरे विपक्ष को गुमराह किया, उन्होंने संसद को काम नहीं करने दिया."
लोकसभा अनिश्चिकाल के लिए स्थगित
लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चिकाल के लिए स्थगित कर दी गई. मॉनसून सत्र में निचले सदन में केवल 19 प्रतिशत ही काम हो पाए. वहीं इस बार एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सके. अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा में लगातार गतिरोध बना रहा. इसे दूर करने के लिए विपक्ष एवं सत्ता पक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई. मानसून सत्र के दौरान केवल 28 और 29 जुलाई के दौरान सदन में सामान्य माहौल देखने को मिला जब लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर लगभग दस घंटे तक चर्चा हुई.
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