Ram Navami 2024 : श्रीराम के जन्मोत्सव में उनका सूर्य तिलक कर धन्य हुए भगवान भास्कर, भक्त मंत्रमुग्ध

Ram Navami 2024 : रामनवमी के मौके पर आज अयोध्या के राम मंदिर में भगवान भुवन भास्कर ने राम लला का सूर्य तिलक किया. यह नजारा अद्‌भुत था.

Ram Navami 2024 : देश भर में आज भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है. इस बार की रामनवमी बहुत ही खास है क्योंकि श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में उनका भव्य मंदिर बनने के बाद यह पहली राम नवमी है. इस खास मौके पर उनके दर्शन के लिए उमड़ पड़े हैं. इस विशेष अवसर को और भी विशेष बनाने के लिए भगवान राम का अद्‌भुत श्रृंगार किया गया. उन्हें नव वस्त्र पहनाए गए. मुकुट भी नया था और सबसे अनोखी बात यह कि भगवान भुवन भास्कर ने उनका सूर्य तिलक किया. यानी की कुल पांच मिनट तक भगवान राम के ललाट पर सूर्य की किरणें पड़ती रहीं.

अभिजीत मुहूर्त में हुआ सूर्यतिलक

भगवान राम का सूर्यतिलक अभिजीत मुहूर्त में किया गया. इस सूर्य तिलक को हजारों लोगों ने साक्षात देखा तो लाखों लोग इस अनुपम-अद्‌भुत दृश्य को लाइव मोबाइल, टीवी और लैपटाॅप पर देखा. जब बालक श्रीराम के माथे पर सूर्य की किरणें पड़ीं तो यह महसूस हुआ जैसे आज अयोध्या में राजा राम का राजतिलक हो रहा हो. सूर्य तिलक के इस अद्‌भुत दृश्य को बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से साकार किया गया है और इस कार्य में सीएसआईआर केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की की टीम ने भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, बैंगलोर के परामर्श से मंदिर की तीसरी मंजिल से गर्भगृह तक सूर्य के प्रकाश को पहुंचाने के लिए एक सिस्टम बनाया. इस सिस्टम के जरिए ही सूर्य की किरणें गर्भगृह तक पहुंचीं और भगवान का सूर्य तिलक हुआ.

ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम से हुआ सूर्य तिलक

सूर्य तिलक की प्रक्रिया ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम के तहत पूरी की गई है, इस प्रक्रिया में चार आईना और चार लेंस का प्रयोग किया गया है. दर्पण और लेंस के माध्‍यम से सूर्य की किरणों को गर्भगृह की ओर मोड़ कर पहुंचाया गया. अंतिम लेंस और दर्पण सूर्य की किरण को पूर्व की ओर मुख किये हुए श्रीराम के माथे तक पहुंचाई और उनका सूर्य तिलक हुआ. यह बहुत ही अनोखा दृश्य था, जिसे देखकर भक्त मोहित हो गए.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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