Railway: बिजलीकरण से रेलवे ने बचाये करोड़ों रुपये

रेल मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2016-17 के मुकाबले वर्ष 2024-25 में डीजल के खपत में 178 करोड़ लीटर की कमी आयी है. बिजलीकरण के कारण इस दौरान रेलवे के डीजल खपत में 62 फीसदी की कमी आयी और इससे पेट्रो उत्पाद के इंपोर्ट पर होने वाले खर्च में भी कटौती हुई. वर्ष 2024-25 में रेलवे ने ऊर्जा पर लगभग 32378 करोड़ रुपये खर्च किया.

Railway: देश में पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में रेलवे तेजी से काम कर रहा है. कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए रेलवे अपने नेटवर्क का बिजलीकरण तेजी से कर रहा है. रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 से देश में सिर्फ 21801 किलोमीटर ट्रैक का बिजलीकरण हुआ था, वहीं वर्ष 2014-25 के दौरान 46900 किलोमीटर ट्रैक का बिजलीकरण करने में सफलता हासिल हुई है. देश के 99.4 फीसदी ब्रॉड गेज नेटवर्क का बिजलीकरण पूरा हो चुका है. यही नहीं वर्ष 2023-24 के बाद अब तक 10932 किलोमीटर ट्रैक का बिजलीकरण हुआ है. वर्ष 2020-21 से वर्ष 2024-25 के दौरान रेलवे नेटवर्क के बिजलीकरण पर 29826 करोड़ रुपये खर्च किया गया है. बिजलीकरण के लिए वन विभाग से मंजूरी, मौजूदा सुविधा को हटाना, क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, इलाके में कानून-व्यवस्था के हालात, विभिन्न विभागों से मंजूरी हासिल करना, मौसम के हिसाब से काम के दिन तय कर प्रोजेक्ट को पूरा किया जाता है. 

लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बिजलीकरण से रेलवे की ऊर्जा पर होने वाले खर्च में कमी आयी है. वर्ष 2016-17 के मुकाबले वर्ष 2024-25 में डीजल के खपत में 178 करोड़ लीटर की कमी आयी है. बिजलीकरण के कारण इस दौरान रेलवे के डीजल खपत में 62 फीसदी की कमी आयी और इससे पेट्रो उत्पाद के इंपोर्ट पर होने वाले खर्च में भी कटौती हुई. वर्ष 2024-25 में रेलवे ने ऊर्जा पर लगभग 32378 करोड़ रुपये खर्च किया. 


कचरा प्रबंधन पर दिया जा रहा है जोर

यात्री सुविधा को बेहतर बनाने और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए रेलवे ट्रेन, स्टेशन, कैटरिंग यूनिट और कोच में होने वाले कचरे के निपटान के लिए व्यापक कचरा प्रबंधन नीति पर काम कर रही है. ट्रेन में जमा कचरे को कचरा निपटान के लिए तय स्टेशन पर प्रबंधन के लिए उतारा जाता है. ट्रेन की सफाई में लगे कर्मियों को सख्त हिदायत है कि वे चलती ट्रेन से कचरा नहीं फेंके और ऐसा करने वाले के खिलाफ जुर्माना लगाया जाता है. जरूरत के हिसाब से स्टेशन पर प्लास्टिक बोतल को क्रश करने वाली मशीन लगायी गयी है.

स्थानीय जरूरत के हिसाब से कचरा प्रबंधन के लिए स्थानीय निकाय और रेलवे के बीच समझौता किया गया है. कई जगहों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी का निर्माण हुआ है. पटरियों को साफ रखने के लिए बायो टायलेट को प्राथमिकता के आधार पर लगाया जा रहा है. वर्ष 2004-14 के दौरान ट्रेन में सिर्फ 9587 ऐसे टायलेट थे, जिसकी संख्या 2014 के बाद मौजूदा समय में बढ़कर 361572 हो गयी है. स्वच्छ भारत अभियान के तहत व्यापक पैमाने पर स्टेशनों और ट्रेनों में स्वच्छता अभियान चलाया जाता है. यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए रेलवे लगातार प्रयास कर रहा है. 

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By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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