आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं को लेकर चलेगा महाअभियान, पीएम मोदी ने खूंटी से किया था ऐलान

योजना का मकसद बुनियादी सुविधाओं से दूर आदिवासी बहुल गांवों में सड़क, डिजिटल कनेक्टिविटी, पक्का घर, स्वच्छ पेयजल और अन्य सरकारी सुविधा उनके घरों तक पहुंचाना है. प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी महाअभियान के तहत विकास से दूर देश के 200 जिलों में 22 हजार आदिवासी समूहों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है.

आदिवासी इलाकों में केंद्रीय योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी महा अभियान का दूसरा चरण शुरू किया गया है. इस अभियान का मकसद आदिवासी लोगों के बीच सरकारी योजनाओं की पूरी जानकारी मुहैया कराना है, ताकि वे इसका लाभ उठा सकें.

आदिवासी बहुल गांवों में तेजी से बनेंगे सड़कें, डिजिटल कनेक्टिविटी

योजना का मकसद बुनियादी सुविधाओं से दूर आदिवासी बहुल गांवों में सड़क, डिजिटल कनेक्टिविटी, पक्का घर, स्वच्छ पेयजल और अन्य सरकारी सुविधा उनके घरों तक पहुंचाना है. प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी महाअभियान के तहत विकास से दूर देश के 200 जिलों में 22 हजार आदिवासी समूहों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है. केंद्रीय आदिवासी मंत्रालय ने इसके लिए सूचना, शिक्षा और प्रसार अभियान चलाने का फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के खूंटी से 15 नवंबर 2023 को यह अभियान चलाने की घोषणा की थी.

पहले चरण में देश 100 जिलों को किया जाएगा कवर

पहले चरण के तहत देश के 100 जिलों के 500 ब्लॉक में 15 हजार आदिवासी समुदायों को केंद्रित कर यह योजना शुरू की गयी, जबकि दूसरे चरण में बाकी जिलों को कवर किया जायेगा.

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आदिवासियों को उनके अधिकार के बारे में दी जाएगी जानकारी

इस अभियान के तहत आदिवासी लोगों को उनके अधिकार के बारे में जानकारी दी जायेगी और साथ ही आधार कार्ड, सामुदायिक सर्टिफिकेट, जन-धन खाते, आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और किसान क्रेडिट कार्ड मुहैया कराए जाएंगे. हाट बाजार, कॉमन सर्विस सेंटर, ग्राम पंचायत, आंगनवाड़ी, कृषि विज्ञान केंद्र में यह अभियान चलाया जायेगा.

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