Poonch Attack: ड्रोन, खोजी कुत्तों और हेलीकॉप्टर की मदद से आतंकवादियों की तलाश जारी, 12 हिरासत में

पुंछ हमले के सिलसिले में 12 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया. हिरासत में लिए गए लोगों से आतंकवादी समूह की पहचान का पता लगाने के लिए विभिन्न स्तरों पर पूछताछ की जा रही है. माना जाता है कि आतंकवादी समूह एक साल से अधिक समय से क्षेत्र में सक्रिय था.

जम्मू-कश्मीर के पुंछ में 21 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में पांच जवानों के शहीद होने के बाद बाटा-डोरिया क्षेत्र के घने जंगल में सुरक्षा बलों ने बड़ा तलाश अभियान शुरू किया. इस अभियान में ड्रोन और खोजी कुत्तों का इस्तेमाल किया गया, वहीं एक एमआई हेलिकॉप्टर ने घने वन क्षेत्र की टोह ली. मालूम हो हमले में शहीद हुए जवान राष्ट्रीय राइफल्स इकाई के थे और उन्हें इलाके में आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए तैनात किया गया था.

पुंछ हमले मामले में 12 लोगों को हिरासत में लिया गया

पुंछ हमले के सिलसिले में 12 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया. हिरासत में लिए गए लोगों से आतंकवादी समूह की पहचान का पता लगाने के लिए विभिन्न स्तरों पर पूछताछ की जा रही है. माना जाता है कि आतंकवादी समूह एक साल से अधिक समय से क्षेत्र में सक्रिय था.

एनआईए ने घटनास्थल का किया दौरा

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और इलाके और उस वाहन का निरीक्षण किया, जिस पर हमला किया गया था. पूरे इलाके को घेर लिया गया है और आतंकवादियों को खोजने के लिए ड्रोन एवं खोजी कुत्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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पुंछ हमले को तीन से चार आतंकवादियों ने दिया अंजाम

बताया जा रहा है कि तीन से चार आतंकवादियों के एक समूह ने पुंछ हमले को अंजाम दिया और उन्होंने किसी विस्फोटक, बम या ग्रेनेड का इस्तेमाल किया, जिससे वाहन में आग लग गई. बताया जा रहा है कि हमले को अंजाम देने वाले एक साल से अधिक समय से राजौरी और पुंछ में मौजूद थे और उन्हें इस दुर्गम इलाके के बारे में पूरी जानकारी थी. यह इलाका जम्मू-कश्मीर गजनवी फोर्स (जेकेजीएफ) का गढ़ है और इसका ‘कमांडर’ रफीक अहमद उर्फ रफीक नाई इसी इलाके का रहने वाला है.

नियंत्रण रेखा के पास अलर्ट

नियंत्रण रेखा के पास कड़ी सतर्कता बरती जा रही है और भीम्बर गली-पुंछ मार्ग पर यातायात रोक दिया गया है और लोगों को मेंढर के रास्ते पुंछ जाने की सलाह दी गई है.

पुंछ आतंकी हमले में ये जवान हुए शहीद

शहीद हुए जवानों की पहचान हवलदार मंदीप सिंह, लांस नायक देबाशीश बस्वाल, लांसनायक कुलवंत सिंह, सिपाही हरकृष्ण सिंह और सिपाही सेवक सिंह के रूप में की गई है.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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