भारत-चीन सीमा विवाद में कूदा नेपाल, जानें क्या कहा…

Nepal is confident that our friendly neighbours India & China will resolve border dispute : भारत-चीन सीमा विवाद के बीच नेपाल ने उम्मीद जतायी है कि उनके दोनों पड़ोसी देश अपनी समस्या का समाधान कर लेंगे. नेपाल सरकार ने कहा है कि दोनों देश एक अच्छे पड़ोसी की तरह अपने आपसी समस्याओं का समाधान कर लेंगे. यह विश्व और क्षेत्रीय शांति की लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

नयी दिल्ली : भारत-चीन सीमा विवाद के बीच नेपाल ने उम्मीद जतायी है कि उनके दोनों पड़ोसी देश अपनी समस्या का समाधान कर लेंगे. नेपाल सरकार ने कहा है कि दोनों देश एक अच्छे पड़ोसी की तरह अपने आपसी समस्याओं का समाधान कर लेंगे. यह विश्व और क्षेत्रीय शांति की लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

गौरतलब है कि 12 जून को भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल की तरफ से फायरिंग हुई थी और एक व्यक्ति की मौत हुई थी. हालांकि भारत ने हमेशा यह कहा कि भारत और नेपाल के संबंध मधुर हैं और रहेंगे.

गौरतलब है कि लद्दाख के गलवान घाटी में 15 जून को भारत-चीन के सैनिकों की बीच झड़प हुई थी जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे. चीन को भी नुकसान हुआ था. उसके बाद चीन ने ऐसा दावा किया कि भारतीय सेना उसके इलाके में घुस गयी थी.

हालांकि चीन के साथ हुई झड़प में विश्व के कई देशों ने भारतीय सैनिकों के शहीद होने पर संवेदना जतायी. अमेरिका के विदेश मंत्री ने भी भारतीय सैनिकों के परिवार वालों के प्रति संवेदना जतायी थी. अब नेपाल की ओर से भी बयान आया है.

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भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी तनाव के बीच आज वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने कहा कि हम किसी भी अचानक हुई घटना का जवाब देने के लिए अच्छी तरह से तैयार और तैनात हैं. मैं देश को विश्वास दिलाता हूं कि हम गलवान के बहादुरों के बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने देंगे. देश और दुनिया से जुड़ी हर Hindi News से अपडेट के लिए बने रहें हमारे साथ.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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