किसानों ने मुख्यमंत्री आवास घेरने की भी कोशिश की, लेकिन हजारों किसानों को पुलिस ने नर्मदापुरम रोड स्थित वीर सावरकर सेतु के पास रोक दिया. पहले दौर की वार्ता विफल होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को समस्या के समाधान के लिए चार मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय समिति की घोषणा की है.
बातचीत से निकलेगा हल: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार हमेशा किसानों के हित में खड़ी रही है और प्रदेश में 'किसान कल्याण वर्ष' मनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, "बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने के लिए समिति का गठन किया गया है. कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना के अलावा कृष्णा गौड़, विश्वास सारंग और राकेश सिंह सहित अन्य मंत्री व वरिष्ठ अधिकारी किसानों से चर्चा करेंगे." मुख्यमंत्री ने किसानों से भी अपील की कि वे ऐसा रास्ता निकालें जिससे आम जनता को परेशानी न हो.
यातायात ठप, स्कूल बंद, भारी पुलिस बल तैनात
किसानों के सड़क पर डटे रहने के कारण नर्मदापुरम राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है और कई इलाकों में लंबा जाम लग गया है। पुलिस ने आम लोगों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों के स्कूलों में बुधवार को छुट्टी घोषित कर दी. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और अन्य जिलों से भी अतिरिक्त बल बुलाया गया है.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखा गया पत्र
इस बीच, कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन का लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है. कंषाना ने कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ दिलाने के लिए केंद्र द्वारा तय मौजूदा लक्ष्य सीमा को बढ़ाना बेहद जरूरी है.
कांग्रेस ने साधा निशाना, आंदोलन को बताया जायज
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 'किसान क्रांति पैदल यात्रा' का समर्थन करते हुए भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला. पटवारी ने कहा कि किसान 100 प्रतिशत मूंग खरीदी और खाद की पर्याप्त उपलब्धता जैसी बुनियादी मांगें कर रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों की अनदेखी की या दमन का रास्ता अपनाया, तो यह जनाक्रोश पूरे प्रदेश में फैलेगा.
क्या है किसानों की मांग?
- मूंग की 100% खरीद एमएसपी पर
- किसानों की मांग है कि मूंग खरीदी से जुड़ी ई-टोकन व्यवस्था बेहद लचर है, जिसे या तो ठीक किया जाए या पूरी तरह खत्म किया जाए.
- किसानों को आगामी फसलों के लिए समय पर, सही दर पर और पारदर्शी तरीके से खाद की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.
- केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में की गई घोषणाओं और वादों को जल्द से जल्द लागू किया जाए.
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