Middle East: लगभग पांच करोड़ कुर्द लोगों के सर्वमान्य नेता और अपने समर्थकों के बीच ‘मध्य-पूर्व के ‘नेल्सन मंडेला’ के रूप में प्रसिद्ध अब्दुल्ला ओछालन के तुर्की की जेल में कैद के 27 साल पूरे हो चुके हैं. इस मौके पर दिल्ली के जंतर मंतर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें उन्हें जल्द से जल्द रिहा करने की मांग की गयी. जदयू के पूर्व राज्य सभा सांसद अनिल हेगड़े के नेतृत्व में एक सभा का आयोजन किया गया जिसमें जिसमें उनके संघर्षों और विचारों पर प्रकाश डाला गया. हेगड़े ने कहा कि उनकी मांग को लेकर आंदोलन तेज किया जायेगा और सरकार पर दबाव बनाया जायेगा कि उन्हें जल्द से जल्द रिहा की जाये.
ओछालन 1999 से तुर्की के इमराली द्वीप स्थित उच्च सुरक्षा वाली जेल में बंद हैं. अब्दुल्ला ओछालन वर्ष 1978 में स्थापित ‘कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी’ (पीकेके) के नेता हैं, दशकों से कुर्द लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं. वर्ष 1999 में तत्कालीन दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने ओछालन को अपने देश में राजनीतिक शरण देने के लिए आमंत्रित किया था. लेकिन जब वह दक्षिण अफ्रीका जा रहे थे, तभी उनका अपहरण कर लिया गया और उसी समय से उन्हें इमराली द्वीप की जेल में बंधक बनाकर रखा गया है.
जेल में रहने के बावजूद हौसले में नहीं आयी है कमी
उनके समर्थकों का मानना है कि 27 साल के लंबे एकांत कारावास के बावजूद ओछालन कुर्द लोगों की आकांक्षाओं के वैधानिक प्रतिनिधि और मुख्य वार्ताकार बने हुए हैं. जेल में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का संपादन किया है और ‘लोकतांत्रिक परिसंघवाद’ का दर्शन प्रतिपादित किया है. उनका यह दर्शन पूंजीवाद और पितृसत्ता के विघटन पर जोर देता है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देता है. ओछालन के विचारों का जीवंत उदाहरण उत्तर-पूर्व सीरिया का ‘रोजावा’ क्षेत्र है, जहां कुर्द लोगों की बड़ी आबादी रहती है.
