Shraddha Murder Case: क्या हुआ था उस रात? सुबह-सुबह चोट का इलाज करवाने डॉक्टर के पास पहुंचा था आफताब

श्रद्धा हत्याकांड: डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि मई में वह सुबह के समय आया था. मेरे सहायक ने मुझे इस संबंध में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मैंने उसे देखा तो वह गहरा घाव नहीं था, बल्कि मामूली था. जब मैंने उससे पूछा कि चोट कैसे लगी तो उसने बताया कि फल काटते वक्त चोट लग गयी है.

Shraddha Murder Case: महरौली श्रद्धा हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें कई तरह के चौंकाने वाले खुलासे होते जा रहे हैं. अब जो बात सामने आयी है, उसके अनुसार अपनी ‘लिव-इन पार्टनर’ की हत्या करने और उसके शव के टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने का आरोपी आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Amin Poonawalla) मई के महीने में एक डॉक्टर के पास पहुंचा था. आफताब का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताया है कि वह मई में एक घाव का इलाज कराने उनके पास पहुंचा था. इस बात के सामने आने के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.

डॉक्टर ने जो बात बतायी है उसके सामने आने के बाद कुछ सवाल खड़े हो रहे हैं. जैसे मई के महीने में ही श्रद्धा की हत्या की गयी थी. तो क्या हुआ था उस महीने इस कपल के साथ ? डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पूनावाला जब इलाज के लिए उनके पास आया था, तो बहुत आक्रामक और बेचैन नजर आ रहा था. उससे जब चोट के बारे में पूछा गया तो आरोपी ने बताया कि फल काटते वक्त उसे यह चोट पहुंची हैं.

आरोपी ने क्या कहा डॉक्टर से

डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि मई में वह सुबह के समय आया था. मेरे सहायक ने मुझे इस संबंध में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मैंने उसे देखा तो वह गहरा घाव नहीं था, बल्कि मामूली था. जब मैंने उससे पूछा कि चोट कैसे लगी तो उसने बताया कि फल काटते वक्त चोट लग गयी है. उस वक्त मुझे कोई शक नहीं हुआ था, क्योंकि वह चाकू से होने वाला छोटा-सा घाव नजर आ रहा था.

आरोपी साहसी और आत्मविश्वासी लगा

डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि जब वह इलाज के दौरान पहली बार 28 वर्षीय पूनावाला से मिले तो वह उन्हें काफी साहसी और आत्मविश्वासी शख्स लगा. आगे कुमार ने कहा कि दो दिन पहले पुलिस उसे मेरे अस्पताल लेकर आयी और पूछा कि क्या मैंने इस व्यक्ति का इलाज किया था ? मैंने उसे तुरंत पहचान लिया. जब वह इलाज के लिए आया था तो वह बहुत आक्रामक और बेचैन नजर आ रहा था. आरोपी मेरी आंखों में आंखें डालकर बात कर रहा था. मुझे वह बहुत साहसी और आत्मविश्वासी लगा.

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अंग्रेजी में बात कर रहा था आफताब

आफताब अमीन पूनावाला जब डॉक्टर के पास पहुंचा तो वह अंग्रेजी में बात कर रहा था. डॉक्टर को उसने बताया कि वह मुंबई से है तथा आईटी क्षेत्र में अच्छे अवसरों के कारण दिल्ली आया है. डॉक्टर ने कहा कि मुझे संदेह नहीं हुआ था कि उस व्यक्ति ने किसी की हत्या की होगी. उसने सहजता से टांके लगवाये. आरोपी ने ऐसा प्रदर्शित नहीं किया कि उसे दर्द महसूस हो रहा है. उसने इलाज का भुगतान ऑनलाइन माध्यम के माध्यम से किया.

श्रद्धा: क्या है मामला

गौरतलब है कि आफताब अमीन पूनावाला ने मई में कथित तौर पर वालकर की गला दबाकर हत्या कर दी थी और उसके शव के 35 टुकड़े कर दिये थे. शव को उसने करीब तीन सप्ताह तक दक्षिणी दिल्ली के महरौली में अपने घर में 300 लीटर के फ्रिज में रखा था और बाद में कई दिनों में शहर के अलग-अलग स्थानों पर उन्हें फेंक दिया था.

भाषा इनपुट के साथ

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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